रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने सीमापार आतंकवाद का मुद्दा उठाते हुए पाकिस्तान को आड़े हाथ लिया। इंस्टीट्यूट ऑफ स्ट्रेटजिक रिसर्च के कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि पड़ोसी देश का आतंकियों को मदद देना और वहां आतंकी ढांचे की मौजूदगी लगातार भारत के धैर्य की परीक्षा ले रहे हैं। हम इससे निपटने को लेकर बड़े संयम से काम कर रहे हैं।
रक्षा मंत्री ने कहा कि विदेशी आतंकी संगठनों में युवाओं की भर्ती के साथ ही आतंकियों को हथियारों की आपूर्ति और वित्तीय मदद रोकने को लेकर कड़े कदम उठाए जाने की आवश्यकता है। अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के मौजूदा माहौल को निरंतर अस्थिरता और बढ़ती हिंसा के प्रयासों के साथ अनिश्चितता के तौर पर वर्णित किया जा सकता है। आतंकवाद की स्थायी खतरा भारत के साथ-साथ अफगानिस्तान में भी तेजी से बढ़ रहा है। ज्यादा स्पष्ट तौर पर कहें तो, यह सीमापार आतंकवाद का नतीजा है, जो सुरक्षा के लिए प्राथमिक खतरा है।
फ्रांस के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाने पर जोर : ‘भारत-फ्रांस रक्षा सहयोग’ विषय पर व्याख्यान में रक्षा मंत्री ने कहा कि उनका दौरा यह पुष्टि करता है कि फ्रांस के साथ रणनीतिक साझेदारी भारत प्रतिबद्ध है, खासतौर से रक्षा सहयोग के क्षेत्र में। भारत में रक्षा उद्योग के नए ढांचे के तहत दोनों देश संयुक्त विनिर्माण और प्रौद्योगिकी संचालित साझेदारी के ढांचे के भीतर हमारी रक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने की उम्मीद कर रहे हैं।