सेशेल्स द्वीपसमूह के एक द्वीप पर भारतीय नौसेना के बेस को स्थापित और विकसित करने के समझौते को वहां की संसद मंजूरी नहीं देगी। सेशेल्स विदेश मंत्रालय के एक उच्चाधिकारी ने शुक्रवार को इसकी जानकारी दी।
भारत और सेशेल्स ने इस साल जनवरी में एक सुदूर अजम्पसन द्वीप पर सैन्य बेस बनाने के समझौते पर हस्ताक्षर किया था। हालांकि जल्द ही वहां के प्रमुख विपक्षी नेताओं ने इस परियोजना का विरोध शुरू कर दिया। बता दें कि सेशेल्स हिंद महासागर में स्थित एक छोटा द्वीपसमूह है।
विपक्षी सांसदों ने कहा कि एक व्यस्त जलमार्ग रूट के करीब स्थित अजम्पसन द्वीप पर भारत को प्रवेश देने से हम अपने क्षेत्र को किसी और देश को सौंप देंगे। भारत को सुविधा प्रदान करने से 115 द्वीपों वाले देश की संप्रभुता से समझौता होगा।
विदेश मंत्रालय के सचिव बैरी फाउरे ने कहा कि सरकार समझौते को संसद में पेश नहीं करेगी क्योंकि विपक्षी सदस्यों ने पहले ही कह दिया है कि वे उसे मंजूरी नहीं देंगे।
उन्होंने कहा कि हालांकि यह सवाल बना हुआ है कि क्या समझौता बना रहेगा या रद्द हो जाएगा। लेकिन हम इस समझौते को संसद में पेश नहीं करेंगे। उन्होंने इस बात का उल्लेख किया कि भारत की तरफ से पहले ही समझौते को मंजूरी दी जा चुकी है।
सेशेल्स के राष्ट्रपति डैनी फाउरे इस रविवार को उत्तराखंड की यात्रा पर भारत आने वाले हैं। इस दौरान वे नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात करेंगे। इससे पहले फाउरे ने स्थानीय मीडिया से कहा था कि एजम्प्सन द्वीप पर सैन्य बेस के मुद्दे पर मोदी से साथ चर्चा नहीं होगी और इसलिए यह परियोजना आगे नहीं बढ़ पाएगी।
हिंद महासागर में चीन के बढ़ते प्रभाव के लिए थी महत्वपूर्ण
हिंद महासागर में चीन तेजी से अपना प्रभाव बढ़ा रहा है। इससे भारत को प्रतियोगिता का सामना करना पड़ रहा है। पिछले साल ही चीन ने अपने पहले विदेशी सैन्य बेस का उद्घाटन दुनिया के सबसे व्यस्त जलमार्गों में से एक जिबूती में किया था। असुरक्षा बढ़ने के कारण भारत सेशेल्स में हवाई पट्टी और जेटी विकसित करना चाहता था, जिस कारण 20 सालों के लिए यह समझौता हुआ था।