इंग्लैंड और स्कॉटलैंड में समलैंगिक पुरुषों और सेक्स वर्कर्स के लिए रक्तदान के नियमों में राहत दी जा रही है। यह कदम खून की जांच प्रक्रिया की एक्यूरेसी में सुधार लाने के बाद उठाया गया है। पुरुषों से यौन संबंध बनाने वाला कोई भी पुरुष अब आखिरी बार सेक्सुअल ऐक्टिविटी के तीन महीने बाद रक्तदान कर सकेगा। पहले यह समय 12 महीने का था। इसी तरह सेक्स वर्कर भी तीन महीने में रक्तदान कर सकेंगी। पहले उन पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा था।
जानकारों का मानना है कि इस नियम से खून की गुणवत्ता को नुकसान पहुंचाए बिना ज्यादा लोगों को रक्तदान करने का मौका मिलेगा। खून, अंग और टिशू की सुरक्षा को लेकर एडवाइजरी कमेटी ने बताया कि नए नियम ठीक हैं और इससे डोनर्स को परेशानी नहीं होगी।
ब्रिटेन में डोनेट किया जाने वाला सारा रक्त जरूरी टेस्ट की प्रक्रिया से गुजरता है। इस दौरान हेपेटाइटिटिस बी और सी के अलावा, एचआईवी और अन्य वायरस की जांच की जाती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि किसी भी वायरस के इन्फेक्शन के फैलने या उसका कोई भी असर होने के लिए तीन महीने का वक्त काफी है। इतने समय में इसे खून से आसानी से पहचाना जा सकता है। कमेटी के प्रोफेसर जेम्स न्यूबर्गर ने कहा, "वायरस को पकड़ने की तकनीक में तेजी से बदलाव हुए हैं। अब हम वायरस को बहुत आसानी से पकड़ सकते हैं। अब यह बताना काफी आसान है कि किस डोनर के रक्त में वायरस है।"