संयुक्त राष्ट्र में ब्रिटेन के दूत कैरन पीयर्स ने कहा कि ब्रिटेन के लगाए सभी "आरोपों की जांच की जा सकती है"। उन्होंने कहा कि रूस का जांच में हिस्सा लेना कुछ उसी तरह है जैसा किसी आग लगाने वाले का उसके कारणों की जांच करना। पीयर्स का कहना था कि रूस पर आरोप लगाया कि "द्वितीय विश्व युद्ध के बाद के दौर से हमें सुरक्षित रखने वाले अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को कमजोर आंक रहा है।" उन्होंने कहा कि रूस पर शक करने की कई वजहें हैं, "रूस सरकार समर्थित हत्याएं कराती रही है" और जो "इसकी बात नहीं मानते उन्हें अपना निशाना बनाते हैं।"
ब्रिटेन का कहना है कि रूस की यूलिया स्क्रिपल से मुलाक़ात करने की गुजारिश को हमने आगे बढ़ा दिया है, "उनकी इच्छा का भी सम्मान किया जाना चाहिए।" इधर, संयुक्त राष्ट्र में अमरीकी दूत केली क्यूरी ने कहा कि रूस "राजनीतिक फायदों के लिए " संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा काउंसिल का इस्तेमाल कर रहा है जो "सही नहीं है"। स्क्रिपल और उनकी बेटी को जहर दिए जाने की घटना के मुद्दे पर रूसी सरकार के नजदीकी सूत्र युद्ध की आशंका से इनकार नहीं करते।
ये कहना है रूस के लेफ्टिनेंट जनरल येवगेन बूजीन्स्की का जो 2009 में रिटायर होने से पहले तक रूस के लिए देश की सेना के लिए काम करते थे। सेना से अवकाश लेने के बाद से वो रूसी सेंटर ऑफ़ पॉलिसी रिसर्च के साथ जुड़े हैं। 2004 और 2008 के दौरान रूस में ब्रिटेन के राजदूत रह चुके टोनी ब्रेन्टन का कहना है कि बूजीन्स्की का नजरिया वही है जो अन्य रूसियों का है। बीबीसी के इस कार्यक्रम में टोनी ब्रेन्टन का भी इंटरव्यू लिया गया था।
'अंतरराष्ट्रीय स्तर पर करते हैं बशर का समर्थन'
येवगेन बूजीन्स्की ने बीबीसी टुडे के रेडियो 4 कार्यक्रम में निक रॉबिनसन से बात की। उन्होंने कहा कि "मुझे नहीं लगता कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन जीत या हार के बारे में सोच रहे हैं। मैं मानता हूं कि रूस सीरिया में बशर अल-असद सरकार का समर्थन करता है क्योंकि वो वहां के वैध राष्ट्रपति हैं और वो नहीं चाहता कि
सीरिया में वैसी ही गड़बड़ियां हों जैसा कि लीबिया में हुईं।" "पश्चिमी देश चाहते हैं कि असद को सत्ता से बेदखल किया जाए। अगर वो चुनावों में हार जाएं तो उन्हें पद छोड़ना होगा लेकिन चरमपंथियों के दवाब में नहीं।" येवगेन बूजीन्स्की ने कहा कि रूस सीरिया में बदलाव नहीं चाहता, वो चाहता है कि पहले वहां जारी गृहयुद्ध रोका जाए।
सीरिया में बीते आठ साल से गृहयुद्ध जारी है और असद अपने विरोधियों के खिलाफ सफल रहे तो आशंका जताई जा रही है ये संकट आगे भी जारी रहेगा। बूजीनिस्की इस बात से इनकार नहीं करते। वो कहते हैं, "सीरिया मामले में रूस, तुर्की और ईरान का उद्देश्य अमरीकी नेतृत्व में गठबंधन के उद्देश्यों से अलग है। सभी को सीरियाई शासन में परिवर्तन चाहिए लेकिन रूस ऐसा नहीं चाहता।" कई देशों के रूसी राजनयिकों को बाहर निकालने के बारे में वो कहते हैं कि "रूसी जासूस को जहर दिए जाने वाला मामला आपराधिक घटना है। जब जांच शुरू होती है जांचकर्ता सबसे पहले यही पूछता है कि इससे किसको फायदा होगा। लेकिन इस मामले में जब रूस में चुनाव सिर पर थे रूसी राष्ट्रपति पुतिन को इससे कोई फायदा नहीं पहुंचने वाला था।"
उन्होंने कहा, "रूस ने ऑर्गनाइजेशन फॉर प्रोहिबिशन ऑफ केमिकल वीपन्स से इस मामले में रूस से 13 सवाल किए हैं। रूस पर जिस गैस का इस्तेमाल करने के आरोप लग रहे हैं, उसके इस्तेमाल के बाद अगर किसी को मिनटों के भीतर एंटीडोट ना दिया जाए तो व्यक्ति की मौत हो सकती है, तो इस मामले में उन्हें कैसे बचाया गया? अगर एंटीडोट का इस्तेमाल हुआ तो वहां पर मौजूद लोगों को कैसे पता कि किस गैस का इस्तेमाल हुआ था।"
'कौन मानता है रूस को जिम्मेदार?'
तीन सप्ताह क्रिटिकल हालात में रहने वाली यूलिया फिलहाल खतरे से बाहर हैं। सर्गेई स्क्रिपल फिलहाल गंभीर हालत में हैं। ब्रिटेन की प्रधानमंत्री टेरीजा मे ने बताया था कि सर्गेई स्क्रिपल पर जिस रसायन का इस्तेमाल किया गया है वह नर्व एजेंट का ही रूप है जिसे नोविचोक (रूसी भाषा में 'नवागंतुक') के नाम से जाना जाता है। यह उन नर्व एजेंटों के समूह का हिस्सा है जिसे सोवियत राष्ट्र ने 1970 से 1980 के बीच खुफिया तरीके से विकसित किया था। रूसी विदेश मंत्रालय ने टेरीजा मे के बयान को एक तरह की परीकथा बताया था और उसे खारिज कर दिया था। येवगेन बूजीन्स्की पूछते हैं कि "जब आप अन्य देशों की बात करते हैं तो आप सिर्फ अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोपीय यूनियन की बात करते हैं। और कौन रूस को जिम्मेदार मानता हैं बताएंगे? कौन से बड़े देश हैं जरा नाम लीजिए? भारत, चीन, कोरिया, एशिया का कोई और देश?"
वो कहते हैं कि मौजूदा तनाव की स्थिति "शीतयुद्ध से बुरी स्थिति है क्योंकि ये मामला आगे बढ़ता जा रहा है। मुझे लगता है कि ये इतनी आसानी से खत्म नहीं होगा और इसका नतीजा बेहद बुरा होगा।" वो कहते हैं "यह शीतयुद्ध से बुरी स्थिति है- यानी सचमुच का युद्ध। और ये मानव इतिहास का आखिरी युद्ध होगा।" वो कहते हैं, "केवल सेल्सबरी में जहर दिए जाने वाली घटना नहीं लेकिन जो सब कुछ हो रहा है उसे भी देखा जाना चाहिए। ये युद्ध की स्थिति पैदा हो रही है। अमेरिका और ब्रिटेन रूस पर दबाव बना रहे हैं और कह रहे हैं कि वो ऐसा करना जारी रखेंगे। इससे उन्हें क्या हासिल होगा?"
"अगर आपको लगता है कि इससे रूस में सत्ता परिवर्तन हो जाएगा तो ऐसा सोचना बेकार है। उन्हें अभी अंदाजा नहीं है कि रूसी कौन हैं। विदेश से रूस पर जितना अधिक दबाव डाला जाएगा, रूसी जनता उतना ही अधिक अपने
राष्ट्रपति का समर्थन करेगी।" शीतयुद्ध और असल युद्ध से बुरा युद्ध की बात येवगेन बूजीनिस्की किस आधार पर कह रहे हैं, ये पूछने पर बूजीनिस्की ने कहा, "इस पर बात करना, चर्चा करना जरूरी है। लेकिन आप इस पर चर्चा नहीं करेंगे। आप कहेंगे कि रूस को अपना व्यवहार बदलना चाहिए। हमें इस तरह की चर्चा की जरूरत नहीं हैं।" "आप राजनयिकों को अपने देश से निकालेंगे तो हम भी निकालेंगे, फिर इसके जबाव में आप और राजनयिकों के निकालेंगे। लेकिन आगे कौन सा कदम लेंगे आप? कूटनीतिक संबंध आप तोड़ देंगे लेकिन आगे क्या?" "इन सब कदमों से क्या होगा। ये कदम उठा कर आप रूस को अलग-थलग कर रहे हैं और रूस को अलग-थलग करने के भयंकर परिणाम हो सकते हैं।"
रूसी जासूस को जहर दिए जाने का मामला
महीने भर पहले, चार मार्च को ब्रिटेन के सेल्सबरी में शॉपिंग सेंटर के नजदीक 66 साल के सर्गेई स्क्रिपल और उनकी 33 वर्षीय बेटी यूलिया अचेत हालत में पाए गए थे। वो कभी रूसी सेना की मिलिट्री इंटेलिजेंस में कर्नल थे। साल 2006 में ब्रिटेन के लिए जासूसी करने के आरोप में उन्हें 13 साल की सजा सुनाई गई थी। जिसके बाद 'जासूसों की अदला-बदली' कार्यक्रम के तहत उन्हें ब्रिटेन में शरण मिली थी। ब्रितानी सरकार ने हमले के लिए रूस को जिम्मेदार बताया था। इस घटना से नाराज ब्रिटेन के साथ एकजुटता दिखाते हुए 20 से ज्यादा देश रूस के राजनयिकों को अपने देश से निकाला। इनमें अमेरिका भी शामिल था। अमेरिका ने मार्च के आखिर तक रूस के 60 राजनयिकों को निकालने का आदेश दिया और सिएटल में दूतावास बंद कर दिया। इस प्रतिक्रिया के जवाब में रूस ने अमेरिका के 60 राजनयिकों को निकालने और सेंट पीटर्सबर्ग कॉन्सुलेट को बंद करने का फैसला किया। इन राजनयिकों को देश छोड़ने के लिए एक हफ्ते का वक्त दिया गया। रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव का कहना था कि रूस के राजनयिकों को बाहर करने वाले दूसरे देशों को 'समान' जवाब की उम्मीद रखनी चाहिए।