रूस अमेरिका से मांग कर रहा है कि वो पिछले साल कब्जे में लिए गए दो राजनयिक परिसरों तक उसे पहुंचने दे। रूसी उप विदेशमंत्री सर्गेई रियाबकोव के अनुसार दोनों पक्षों के बीच हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद इस मसले को लगभग सुलझा लिया गया है। रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने अमेरिका की इस कार्रवाई को ''दिनदहाड़े डकैती'' करार दिया था। पिछले साल दिसंबर में अमेरिका ने 35 रूसी राजनयिकों को बर्खास्त कर दिया था और इन परिसरों को बंद कर दिया था। अमेरिका ने तब आरोप लगाया था कि ये लोग अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे थे। रूस और अमेरिका के अधिकारियों ने इस मसले पर बात की है।
अमेरिकी विदेश मंत्रालय में अंडर सेक्रेटरी थॉमस शैनन ने रूसी उप विदेशमंत्री सर्गेई रियाबकोव की वॉशिंगटन में मेजबानी की है। रियाबकोव और अमरीकी राजदूत के बीच 3 घंटे तक बैठक हुई। बैठक के बाद पत्रकारों के साथ बात करते हुए रियाबकोव ने कहा कि इस मसल को 'लगभग' सुलझा लिया गया है। दूसरी तरफ अमेरिकी अधिकारी की तरफ से कोई बयान जारी नहीं किया गया। ये बैठक जून में सेंट पीटर्सबर्ग में होनी थी, लेकिन यूक्रेन में रूसी गतिविधियों के विरोध में अमरीका ने जब 38 लोगों और संगठनों को प्रतिबंध सूची में डाल दिया तो ये बैठक स्थगित हो गई थी। बैठक से पहले रूस ने साफ किया था कि उनकी मांग राजनायिक सुविधाएं बहाल करने से संबंधित हैं।
रूसी प्रवक्ता पेस्कोव का कहना था, "हमें ये कतई स्वीकार नहीं कि अमेरिका राजनयिक संपत्तियों को लौटाने को लेकर शर्तें लगाए। हमारा मानना है कि रूसी संपत्ति बिना किसी शर्त या वार्ता के लौटाई जानी चाहिए।" विदेश मंत्री लावरोव का कहना था कि ये अच्छी परवरिश वाले और भले लोगों का तरीका नहीं है। बेलारूस की अपनी यात्रा के दौरान उन्होंने कहा, "आप ऐसी किसी संपत्ति को कैसे जब्त कर सकते हैं जो एक द्विपक्षीय, अंतर-सरकारी दस्तावेज द्वारा संरक्षित है और जब उसे लौटाने की बात हो तो आप ये कहें कि 'हमारा तो हमारा है और जो आपका है उसे हम साझा करेंगे'।"