श्रीलंका के अपदस्थ प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे की यूनाइटेड नेशनल पार्टी (यूएनपी) ने राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरीसेना द्वारा संसद को भंग किए जाने को अवैध करार दिया है। पार्टी ने कहा है कि वह इस फैसले को अदालत में चुनौती देगी।
एक दिन पहले ही राष्ट्रपति ने 5 जनवरी को मध्यावधि चुनाव कराने की घोषणा की थी। पार्टी ने एक बयान में कहा कि कानून का शासन व निरंकुश कदमों से संविधान की रक्षा सुनिश्चित करने के लिए पार्टी अदालतों से हस्तक्षेप का अनुरोध करेगी। पूर्व वित्त मंत्री और यूएनपी नेता मंगला समरवीरा ने कहा कि सिरीसेना के बढ़ते अत्याचार का अदालतों में, संसद में और चुनाव में मुकाबला किया जाएगा।
सिरीसेना ने 26 अक्तूबर को विक्रमसिंघे को बर्खास्त कर दिया था। सिरीसेना द्वारा संसद को भंग किए जाने तथा मध्यावधि चुनाव की घोषणा किए जाने से श्रीलंका में राजनीतिक संकट गहरा गया है। सिरीसेना की पार्टी के नेता और मंत्री दिनेश गुनावर्दन ने आरोप लगाया कि संसद अध्यक्ष करू जयसूर्या के आचरण के कारण संसद भंग की गई।