रिपब्लिक ऑफ आयरलैंड में विवादित परिस्थितियों में भारतीय मूल की सविता हलप्पनवार की मौत को लेकर वहाँ हज़ारों लोगों ने रैली की है। इन लोगों की माँग है कि गर्भपात से जुड़े आयरिश कानून में बदलाव किया जाए।
31 साल की सविता की आयरलैंड में 28 अक्तूबर को मौत हो गई थी। परिवार का आरोप है कि सविता के कहने के बावजूद डॉक्टरों ने गर्भपात करने से मना कर दिया था और उनकी मौत हो गई। उस समय उनका गर्भ 17वें महीने में था।
शनिवार रात को डबलिन में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए हैं। ये लोग आयरलैंड के संसद तक गए जहाँ मोमबत्तियाँ जलाई गईं और एक मिनट तक मौन रखा गया। अन्य शहरों में भी प्रदर्शन हुए हैं। इस बीच आयरिश पुलिस ने पुष्टि की है कि इस मामले में हो रही जाँच में वे मदद कर रही है।
कानून पर विवाद
सविता की मौत का कारण सेप्टीसीमिया बताया गया है। उन्हें पीठ दर्द की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती करवाया गया था और बाद में उन्हें बताया गया कि मिसकैरज हो गया है। सविता के पति प्रवीण कहते हैं कि उनकी पत्नी ने ये बात स्वीकार कर ली थी कि उनका बच्चा ज़िंदा नहीं बचेगा और कई बार गर्भपात के लिए अनुरोध किया था।
प्रवीण ने बताया, “डॉक्टरों ने गर्भपात करने से मना कर दिया था क्योंकि भ्रूण अभी ज़िंदा था। अस्पताल अधिकारियों ने बताया कि आयरलैंड कैथलिक देश है।” वहीं अस्पताल का कहना है कि इस मामले में तथ्य अभी स्थापित नहीं हुए हैं और वे जाँच में मदद कर रहे हैं। माना जा रहा है कि जाँच के नतीजे सार्वजनिक किए जाएंगे।