अरब देशों के साथ छोड़ने के बाद कतर के लिए खाने- पीने के पदार्थों के लाले पड़ने लगे हैं। कतर पर आतंकवादी संगठनों को समर्थन देने का आरोप लगाते हुए सऊदी अरब, ईरान, बहरीन और मिस्र ने उससे हालही में कूटनीतिक और व्यापारिक संबंध खत्म करने का ऐलान किया था।
कतर 2.6 लाख की विशाल विदेशी आबादी के साथ खाद्य पदार्थों के आयात पर पूरी तरह से निर्भर है। बताते चले कि कतर पर आतंकवादी संगठनों को समर्थन देने का आरोप लगाते हुए सऊदी अरब, ईरान, बहरीन और मिस्र ने उससे हालही में कूटनीतिक और व्यापारिक संबंध खत्म करने का ऐलान किया था, जिसके बाद से कतर खाद्य पदार्थों की पूर्ति के लिए संकट का सामना कर रहा है।
मामले में एक सरकारी अधिकारी ने बुधवार को कहा कि कतर की सरकार ईरान और तुर्की से बातचीत कर रही है ताकि पानी और खाद्य पदार्थों की आपूर्ति हो सके। हालांकि इसके पहले कतर के लिए सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात से खाद्य पदार्थों का आयात किया जाता था, लेकिन कूटनीतिक और व्यापारिक संबंधों के गड़बड़ होने के चलते आपूर्ति की इन संभावनाओं पर विराम लगा दिया है।
एक सरकारी अधिकारी ने न्यूज एजेंसी रायटर्स से बातचीत करते हुए कहा कि हम तुर्की और ईरान और अन्य देशों के साथ खाद्य पदार्थों की मुश्किल से निपटने के लिए बातचीत कर रहे हैं।
आगे उन्होंने कहा कि कतर एयरवेज की कार्गो उड़ानें देश में आपूर्ति लाएगी।
हालांकि कतर के विदेश मंत्री ने अंगेजी न्यूज एजेंसी सीएनएन को बताया कि खाद्य आपूर्ति की कोई समस्या नहीं है। 2014 के बाद से हमारे पास रणनीतिक भंडार हैं, हमें नहीं लगता है कि जनजीवन प्रभावित होगा। मामले में तुर्की के मुख्य निर्यात व्यापार संगठन के प्रमुख ने कहा कि कतर के भोजन और पानी की मांग को पूरा करने के लिए हम तैयार हैं।
बता दें कि सोमवार को सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, मिस्र, मालदीव, लीबिया और यमन ने कतर के साथ राजनयिक संबंधों को काट दिया गया है। इसके साथ ही कतर से और देशों के बीच के हवाई उड़ानों को निलंबित कर दिया गया है। बहरहाल कतर ने अपने निवासियों को इस बात का आश्वासन दिया है कि सामान्य जीवन जारी रहेगा। देश, लगभग 2.6 लाख की एक विशाल विदेशी आबादी के साथ खाद्य आयात पर पूरी तरह से निर्भर है।
गौरतलब है कि हालही में कतर पर आतंकवादी संगठनों को समर्थन देने का आरोप लगाते हुए सऊदी अरब, ईरान, बहरीन और मिस्र ने उससे कूटनीतिक और व्यापारिक संबंध खत्म करने का ऐलान किया था। अशंका जताई जा रही है कि कतर और अरब देशों के बीच का यह विवाद मध्य-पूर्व एशिया में आर्थिक और राजनीतिक विवादों को जन्म देने की वजह बन सकता है। इसके अलावा क्षेत्र में कई और नए विवाद उभर सकते हैं। कतर में सऊदी और अन्य देशों की ओर से लगाई गई पाबंदियों के चलते अफरातफरी का माहौल दिख रहा है।