तमाम स्वयंसेवी संगठनों की फंडिंग पर मोदी सरकार की सख्ती के खिलाफ विश्व एड्स कांफ्रेंस में तमाम अंतरराष्ट्रीय कार्यकर्ताओं ने बृहस्पतिवार को प्रदर्शन किया। इन्होंने बाकायदा माइक लेकर मोदी के खिलाफ शेम-शेम की नारेबाजी की और पूरे कन्वेशन सेंटर में जुलूस निकाला।
इनके हाथों में विरोध की तख्तियां थीं जिसमें सरकार पर फारेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट (एफसीआरए) के दुरुपयोग के आरोप थे। अधिवेशन में यह पहला मौका है जब किसी देश की सरकार के खिलाफ इस तरह का विरोध प्रदर्शन किया गया।
देश में मोदी सरकार ने उन एनजीओ पर शिकंजा कसा है जो जन स्वास्थ्य सेवाओं के लिए आ रहे विदेशी धन का दुरुपयोग कर रहे हैं। सरकार तमाम एनजीओ की जांच कर रही है कि वे बाहर से आने वाले पैसे को कैसे खर्च कर रहे हैं। इस अभियान के कारण कई एनजीओ की फंडिंग भी रोक दी गई है।
इस विरोध प्रदर्शन में इंटरनेशनल एड्स सोसाइटी समेत करीब तीन दर्जन से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने हिस्सा लिया। उनका कहना था कि सरकार की इस सख्ती से एचआईवी रोगियों के लिए चल रहे जागरूकता अभियान प्रभावित हो रहे हैं।
इन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ऐसा राजनीतिक कारणों से कर रही है। जन स्वास्थ्य से जुड़ी सेवाओं में राजनीति नहीं होनी चाहिए। इससे न केवल एचआईवी का इलाज प्रभावित होगा, बल्कि सरकार की ये नीति मानवाधिकार अधिकारों के भी खिलाफ है।