गोरखपुर पुलिस के मुताबिक, मोहद्दीपुर निवासी प्रॉपर्टी डीलर छोटू उर्फ संतोष निषाद का टिंकू पासवान, मानवेंद्र सिंह, संजय निषाद व अजीत तिवारी से विवाद था। इसके चलते चारों ने उसे ठिकाने लगाने की साजिश रची और आठ अप्रैल को संतोष को बातचीत के बहाने पीएसी कैंप के पास मोहल्ला आजादनगर बिछिया में राजीव ऋषि तिवारी के घर बुलाया।
वहां संतोष की गोली मारकर हत्या करके फरार हो गए। राजीव ऋषि शव ठिकाने लगाने के इरादे से निकला और पुलिस की सक्रियता बढ़ने पर फरार हो गया। पुलिस ने संजय निषाद व टिंकू पासवान को गिरफ्तार किया, जबकि मानवेंद्र सिंह ने पुलिस क्षेत्राधिकारी के कार्यालय पहुंचकर खुद को कानून के हवाले कर दिया।
फरार राजीव ऋषि तिवारी पर 10 अप्रैल को इनाम घोषित किया गया था और पांचवें आरोपी अजीत तिवारी की अभी तलाश जारी है।
हत्याकांड में दो आरोपियों की गिरफ्तारी और तीसरे द्वारा खुद को पुलिस के हवाले किए जाने के साथ राजीव ऋषि पर इनाम की घोषणा की भनक लगते ही परिवारीजन परेशान हो उठे। एनकाउंटर के डर से अंडरग्राउंड राजीव ऋषि अपनी जान बचाने के जुगाड़ में जुटा था।
गोरखपुर में उसके करीबी लोग वकीलों व परिचित पुलिसकर्मियों से संपर्क साधने में जुटे थे। इस बीच गोरखपुर परिक्षेत्र के रहने वाले निरीक्षक धर्मेश कुमार शाही को एक मुखबिर के जरिये 25 हजार के इनामी राजीव ऋषि के ठिकाने की भनक लग गई और उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस रिकार्ड के मुताबिक, राजीव ऋषि ने पुलिस टीम पर दो फायर किए और जवाब में पुलिस ने भी उस पर गोली दागी लेकिन कोई हताहत नहीं हुआ।