फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नेपाल में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा- मां जानकी के बिना अधूरी है अयोध्या

Sat, 12 May 2018 11:00 AM IST
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
विज्ञापन
pm-modi
विज्ञापन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिनों की यात्रा पर नेपाल मे हैं। चार वर्ष के शासन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की यह तीसरी नेपाल यात्रा है। पीएम मोदी ने इस मौके पर जनकपुर- अयोध्या के बीच चलने वाली बस को हरी झंडी दिखाई। जो कि गोरखपुर होकर गुजरेगी। इस बस में एक साथ 66 यात्री सवार हो सकते हैं। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी नागरिक अभिनन्दन समारोह में पहुंचे, जहां पारंपरिक गाजे-बाजे के साथ उनका स्वागत किया गया।  प्रधानमंत्री नागरिक अभिनन्दन समारोह में नेपाल के लोगों को संबोधित करते हुए पीएम ने कहा- 
विज्ञापन


आज मैंने मां जानकी का दर्शन किया, कल मुक्तिनाथ धाम और फिर पशुपतिनाथ जी का आशीर्वाद लेने भी जाऊंगा। मुझे विश्वास है कि देव आशीर्वाद और आप जनता के आशीष से जो भी समझौते होंगे वो समृद्ध नेपाल और खुशहाल भारत के संकल्प को साकार करने में सहायक होंगे

भारत और नेपाल के बीच व्यापार भी रिश्तों की एक अहम कड़ी है। नेपाल बिजली उत्पादन के क्षेत्र में तेज़ी से विकास कर रहा है। आज भारत से लगभग 450 मेगावाट बिजली नेपाल को सप्लाई होती है। इसके लिए हमने नई ट्रांसमिशन लाइंस बिछाई हैं।
विज्ञापन



पिछले महीने हमने कृषि क्षेत्र में एक नई साझेदारी की घोषणा की है। इसके तहत कृषि के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। दोनों देशों के किसानों की आमदनी कैसे बढ़ाई जाए इस पर ध्यान दिया जाएगा। खेती के क्षेत्र में साइंस और टेक्नॉलॉजी के इस्तेमाल में सहयोग बढ़ाया जाएगा

आज ही प्रधानमंत्री ओली जी के साथ मिल कर मैंने जनकपुर से अयोध्या की बस सेवा का उद्घाटन किया है। पिछले महीने प्रधानमंत्री ओली और मैंने बीरगंज में पहली इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट का उद्घाटन किया।

हमने शासन और प्रशासन में कई सुधार किए हैं। प्रक्रियाओं को सरल बनाया है। आज दुनिया हमारे उठाए गए कदमों की तारीफ कर रही है। हम राष्ट्र निर्माण और जनभागीदारी का संबंध और मजबूत कर रहे हैं। 

जीवन आसान हो, आम जन को व्यवस्थाओं से जूझना ना पड़े। भ्रष्टाचार और दुराचार से रहित समाज और सिस्टम हो। ऐसे न्यू इंडिया  की तरफ हम आगे बढ़ रहे हैं।
हम एक नए भारत का निर्माण कर रहे हैं, जहां गरीब-से-गरीब व्यक्ति को भी प्रगति के समान अवसर मिले। जहां भेदभाव-ऊंच-नीच ना हो, सबका सम्मान हो। जहां बच्चों को पढ़ाई, युवाओं को कमाई और बुजुर्गों को दवाई मिले। 

हमने भारत में एक बहुत बड़ा संकल्प लिया है। ये संकल्प है न्यू इंडिया का। 2022 को भारत की आजादी के 75 वर्ष पूरे हो रहे हैं। तब तक सवा सौ करोड़ हिन्दुस्तानियों ने न्यू इंडिया  बनाने का लक्ष्य रखा है।

जब “सबका साथ, सबका विकास” की बात करता हूं, तो सिर्फ भारत के लिए ही नहीं, सभी पड़ोसी देशों के लिए भी मेरी यही कामना होती है। और जब नेपाल में “समृद्ध नेपाल, सुखी नेपाली” की बात होती है, तो मेरा मन भी हर्षित होता है। सवा सौ करोड़ भारतवासियों को भी खुशी होती है।

नेपाल की समृद्धि और खुशहाली की कामना भारत हमेशा से करता आया है। प्रधानमंत्री ओली को भी उनके इस विजन को पूरा करने के लिए मैं शुभकामनाएं देता हूं। 

नेपाल सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन के लिए एक नए चरण में प्रवेश कर रहा है जो सुशासन और समावेशी विकास पर आधारित है। दस साल पहले नेपाल के नौजवानों ने बुलेट छोड़कर बैलेट का रास्ता चुना। युद्ध से बुद्ध तक के इस सार्थक परिवर्तन के लिए भी मैं नेपाल के लोगों को बधाई देता हूं।

विकास की पहली शर्त होती है लोकतंत्र। मुझे खुशी है कि लोकतांत्रिक प्रणाली को आप मजबूती दे रहे हैं। हाल में ही आपके यहां चुनाव हुए। आपने एक नई सरकार चुनी है। अपनी आशांओं आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए आपने जनादेश दिया है। 

भारत दशकों से नेपाल का एक स्थाई विकास साझेदार है। नेपाल हमारी 'नेबरहुड फर्स्ट पॉलिसी' में सबसे पहले आता है।

भारत और नेपाल की मित्रता कैसी रही है, इसको रामचरितमानस की इन चौपाइयों के माध्यम से समझा जा सकता है।

जे न मित्र दुख होहिं दुखारी।
तिन्हहि बिलोकत पातक भारी॥

निज दुख गिरि सम रज करि जाना।
मित्रक दुख रज मेरु समाना॥


 

भारत नेपाल संबंध किसी परिभाषा से नहीं बल्कि भाषा से बंधे हैं

ये समय हमें मिलकर शांति, शिक्षा,सुरक्षा, समृद्धि, और संस्कारों की पंचवटी की रक्षा करने का है। हमारा ये मानना है कि नेपाल के विकास में ही क्षेत्रीय विकास का सूत्र है।

भारत और नेपाल दो देश हैं, लेकिन हमारी मित्रता आज की नहीं त्रेता युग की है। राजा जनक और राजा दशरथ ने सिर्फ जनकपुर और अयोध्या ही नहीं, भारत और नेपाल को भी मित्रता और साझेदारी के बंधन में बांध दिया था।

ये बंधन है राम-सीता का। बुद्ध का, महावीर का। यही बंधन रामेश्वरम् में रहने वाले को खींच कर पशुपतिनाथ ले आता है। यही बंधन लुम्बिनी में रहने वाले को बोधगया ले जाता है। और यही बंधन, यही आस्था, यही स्नेह, आज मुझे जनकपुर ले आया है

भारत नेपाल संबंध किसी परिभाषा से नहीं बल्कि भाषा से बंधे हैं। ये भाषा आस्था की है, ये भाषा अपनेपन की है, ये भाषा रोटी की है और ये भाषा बेटी की है। ये मां जानकी का धाम है, जिसके बिना अयोध्या अधूरी है। 

आपकी धर्मनिष्ठा सागर से गहरी है और आपका स्वाभिमान सागरमाथा से ऊंचा है। जैसे मिथिला की तुलसी भारत के आंगन में पावनता, शुचिता और मर्यादा की सुगंध फैलाती है वैसे ही नेपाल से भारत की आत्मीयता इस संपूर्ण क्षेत्र को शांति, सुरक्षा और संस्कार की त्रिवेणी से सींचती है। 


पीएम मोदी  ने जनकपुर धाम परिसर में लोगों को संबोधित किया और कहा  'मैं जनकपुर आकर बहुत खुश हूं। मैं राजा जनक और माता जानकी के चरणों में प्रणाम करता हूं। मैं नेपाल के प्रधानमंत्री ओली का शुक्रिया अदा करता हूं। आज जिस तरह से नेपाल में मेरा स्वागत किया गया है यह दिखाता है कि किस तरह से नेपाल के लोग भारत को पंसद करते हैं।'

'पूरी दुनिया में पर्यटन तेजी से बढ़ रहा है। आज मां जानकी के घर से रामायण सर्किट की शुरुआत होगी जो दोनों देशों के लोगों के लिए मिसाल साबित होगी।'

जनकपुर धाम में जनता को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा 'जिस उत्तर प्रदेश के बनारस ने मुझे सांसद बनाया उस यूपी और नेपाल का नाता अतुल्यनीय है। आज दोनों देशों के लिए सीधी बस सेवा शुरू हो रही है जो दोनों देशों के लिए एक नया आयाम कायम करेगी।' उन्होंने कहा 'जनकपुरीधाम आना मेरे लिए सौभाग्य की बात है और मैं आज एकादशी के दिन इस मंदिर में हूं।'

पीएम मोदी का स्वागत पारंपरिक तरीके से किया गया और वह अभी जानकी मंदिर में पूजा-अर्चना कर रहे हैं। उन्हें गहरे गुलाबी रंग की टोपी पहनाई गई है।  पूजा अर्चना के साथ पीएम मोदी ने वहां झाल-मजीरा भी बजाया।

दो दिनों की यात्रा पर नेपाल पहुंचे पीएम मोदी का जनकपुर एयरपोर्ट पर जोरदार स्वागत किया गया। यहां से मोदी सीधे जानकी मंदिर पहुंचे। मंदिर में उनका स्वागत नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने किया। सूत्रों की माने तो जानकी मंदिर के गर्भगृह में जाकर प्रधानमंत्री करीब 45 मिनट पूजा-अर्चना करेंगे। 

इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नेपाल के पीएम केपी ओली संयुक्त रूप से रामायण सर्किट का उद्घाटन करेंगे और अयोध्या-जनकपुर बस सेवा का शुभारंभ भी करेंगे। संयुक्त उद्घाटन के बाद मोदी नागरिक अभिनंदन ग्रहण करने के साथ ही दो नंबर प्रदेश की जनता को संबोधित भी करेंगे। दो नंबर प्रदेश सरकार के अनुसार अभिनंदन स्थल में एक लाख से अधिक लोगों की सहभागिता रहेगी। जनकपुर के जनसभा में सहभागी होने के बाद मोदी काठमांडू जाएंगे।
 
विज्ञापन

अटल बिहारी वाजपेयी भी जनकपुर पहुंचे थे 

इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नेपाल के पीएम केपी ओली संयुक्त रूप से रामायण सर्किट का उद्घाटन करेंगे और अयोध्या-जनकपुर बस सेवा का शुभारंभ भी करेंगे। संयुक्त उद्घाटन के बाद मोदी नागरिक अभिनंदन ग्रहण करने के साथ ही दो नंबर प्रदेश की जनता को संबोधित भी करेंगे। दो नंबर प्रदेश सरकार के अनुसार अभिनंदन स्थल में एक लाख से अधिक लोगों की सहभागिता रहेगी। जनकपुर के जनसभा में सहभागी होने के बाद मोदी काठमांडू जाएंगे।

सहयोग परियोजना की घोषणा की संभावना 

बीरगंज स्थित भारतीय महावाणिज्य दूतावास बीसी प्रधान के अनुसार भारत नेपाल के साथ रेल, पानी और कृषि क्षेत्र के माध्यम से जुड़ना चाहता है। कुछ जगहों में इन परियोजनाओं की घोषणा भी हो सकती है। नेपाल के प्रधानमंत्री ओली के हालिया भारत दौरे में हुए समझौते और घोषणा के कार्यान्वयन के विषय में भी मोदी की इस यात्रा के दौरान विचार विमर्श होगा।

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भी विपक्षी दल के नेता रहते वक्त 26 साल पहले जनकपुर पहुंच कर जानकी मंदिर के दर्शन किए थे। वाजपेयी ने एक रात जनकपुर में ही बिताई थी और स्थानीय लोगों को संबोधित भी किया था।

‘पड़ोसी पहले’ की नीति को दर्शाती यात्रा

पीएम मोदी ने अपनी दो दिवसीय नेपाल यात्रा को अपनी सरकार की पड़ोसी पहले की नीति के प्रति प्रतिबद्ध्ता के रूप में परिभाषित किया है। उन्होंने कहा कि 'हिमालयी राज्य नए युग में प्रवेश कर चुका है। भारत उसका मजबूत साथी बना रहेगा। यह भारत और व्यक्तिगत रूप से मेरी प्राथमिकता को दिखाता है कि हम अपने दशकों पुराने और करीबी मित्र नेपाल से जुड़े रहना चाहते हैं। उच्च स्तरीय और नियमित संपर्क हमारी सरकार की ‘पड़ोसी पहले’ की प्राथमिकता को दिखाते हैं।'

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें