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बोस्निया के 'युद्ध अपराधी' की अदालत में जहर पीने से मौत

Thu, 30 Nov 2017 05:23 PM IST
बीबीसी, हिन्दी
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प्रालियेक
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1992 से 95 के बीच बोस्निया में चले गृहयुद्ध के युद्ध अपराधी स्लोबोदान प्रालियेक ने हेग में चल रही सुनवाई के दौरान जहर पी लिया। क्रोएशिया के सरकारी मीडिया के मुताबिक स्लोबोदान की बाद में अस्पताल में मौत हो गई। लेकिन खबर लिखे जाने तक क्रिमिनल ट्राइब्यूनल ने मौत की पुष्टि नहीं की है। स्लोबोदान बोस्निया क्रोएशिया के उन छह राजनीतिक और सैन्य नेताओं में से थे, जिनकी सुनवाई हेग में अंतरराष्ट्रीय क्रिमिनल ट्राइब्यूनल (ICTY) में चल रही थी।
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आखिरी अपील पर सुनवाई

स्लोबोदान को मोस्टार शहर में किए गए युद्ध अपराधों के लिए 2013 में 20 साल की सजा सुनाई गई थी। यह सुनवाई उस सजा के खिलाफ की गई आखिरी अपील पर हो रही थी। जैसे ही स्लोबोदान को पता चला कि ट्राइब्यूनल ने उनकी सजा को बरकरार रखा है, उन्होंने कहा, ''मैंने जहर पी लिया है।'' हेग में मौजूद बीबीस संवादादाता एना होलीगन ने बताया कि फैसला आते ही स्लोबोदान खड़े हुए, हाथ मुंह तक ले गए और कुछ पीने के अंदाज में सर पीछे किया। ऐसा लगा जैसे उन्होंने गिलास से कोई तरल पदार्थ मुंह में डाला।
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अदालत घटनास्थल बनी

कोर्ट - फोटो : bbc
जज कार्मेल एजिएस ने तुरंत ही कार्रवाई रोक दी और एंबुलेंस बुलाई गई। जज एजिएस ने कहा, ''ठीक है, हम सुनवाई रोकते हैं। वह गिलास मत हटाना जिससे उन्होंने कुछ पिया है।'' पर्दे गिराए जाने से पहले तक अदालत में अफरातफरी मची हुई थी। थोड़ी ही देर में एंबुलेंस पहुंच गई। एक हेलीकॉप्टर ट्राइब्यूनल की इमारत के ऊपर मंडराने लगा। डॉक्टरों की टीम अपने बैग के साथ तेजी से अंदर जाती नजर आई। एक घंटे बाद अदालत के एक गार्ड ने रॉयटर्स को बताया कि प्रालियेक का तब भी इलाज चल रहा था। बोस्निया क्रोएशिया की सेना (एचवीओ) के पूर्व कमांडर स्लोबोदान को मानवता के खिलाफ अपराध के जुर्म में सजा मिली थी।

मुसलमानों के खिलाफ

संयुक्त राष्ट्र वॉर क्राइम ट्राइब्यूनल के मुताबिक जंग के दौरान 1993 में स्लोबोदान को खबर मिली कि सेना के जवान मुसलमानों को प्रोजोर में इकट्ठा कर रहे हैं। लेकिन इसके बाद भी स्लोबोदान ने उसे रोकने के लिए कुछ नहीं किया। बताया जाता है कि उनके पास यह जानकारी भी थी कि मुसलमानों की हत्या, अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं पर हमले और शहर की ऐतिहासिक मस्जिदों और पुलों को तबाह करने की योजना बनाई जा रही है, लेकिन उन्होंने फिर भी कुछ नहीं किया। 
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