शोरोज और शैलफिश इकट्ठा करने के लिए गोताखोरों को समुद्र में काफी गहरे उतरना पड।ता है। इस दौरान उन्हें मल-मूत्र भी रोकना पड।ता है क्योंकि वह ट्रक के टायर के रबड। से बनी ड्रेस में होते हैं और उनके साथ मौजूद उपकरणों में पानी जाने का भी डर होता है।
गोताखोरों के साथ समुद्र की सतह पर नाव पर क्रू के और सदस्य भी होते हैं जो उनकी मदद करते हैं। रामोस भी उस दिन इसी तरह की ड्रेस में पानी के अंदर थे। तब उन्हें महसूस हुआ कि उनके मुंह में ऑक्सीजन देने के लिए लगी नली से हवा आने की बजाय ऊपर की तरफ खिंच रही है।
इस दौरान किसी कारण से नाव और रामोस से जुड़ी नली कट गई और रामोस को 36 मीटर से अचानक तेजी से ऊपर आने के लिए कहा गया। समुद्र की सतह तक आने के इन कुछ मिनटों ने रामोस की पूरी जिंदगी बदल दी।
नाइट्रोजन का असर
नेवल मेडिकल सेंटर में अंडरवॉटर फिजिशियन रॉल अलेकांद्रो एगुवादो ने बताया कि जब हम डुबकी लगाते हैं तो हम ज्यादा दबाव में होते हैं और इस कारण ऑक्सीजन और हवा में कई बदलाव होते हैं। हवा में नाइट्रोजन की मात्रा 78 प्रतिशत होती है। हमारा शरीर इस गैस का इस्तेमाल नहीं करता है। लेकिन, सतह पर वापस आने के दौरान नाइट्रोजन खून के अंदर चली जाती है।
ऐसे में गोताखोरों को धीरे-धीरे ऊपर आना होता है जिससे नाइट्रोजन को रक्त वाहिकाओं से होते हुए फेफड़ों तक पहुंचने का काफी समय मिल जाता है और फिर गैस शरीर से बाहर चली जाती है। लेकिन, तेजी से ऊपर आने पर नाइट्रोजन से बुलबुले बन जाते हैं और ये इतने बड़े होते हैं कि इससे रक्त प्रवाह रुक जाता है। इसे डिकंप्रेशन सिंड्रोम कहते हैं।
समुद्र के अंदर से सतह पर आने के लिए समय भी निर्धारित किया गया है। अगर यह काम तय प्रक्रिया के तहत नहीं किया गया तो नाइट्रोजन हड्डियों तक पहुंच जाती है। इससे बोन टिशू भी मर जाते हैं। इसके कारण सूजन, सिरदर्द, चक्कर आने से लेकर लकवा और मौत भी हो सकती है। रामोस एक पैर से अपाहिज थे लेकिन उन्होंने अपने पिता की तरह ही गोताखोरी का काम करने का फैसला किया।
वह पहले ज्यादा गहराई तक नहीं जा पाते थे लेकिन रामोस के बेटे को अस्थमा होने के कारण उन्हें इलाज के लिए ज्यादा पैसों की जरूरत थी। इसके लिए रामोस ने समुद्र में ज्यादा गहराई में जाना शुरू किया ताकि और सीफूड मिल सके। हालांकि, डॉक्टरों को अभी तक यह साफ नहीं है कि रामोस को ये बीमारी गोताखोरी के कारण हुई है। इसकी वजह ट्यूमर भी हो सकता है। इसकी जांच की जा रही है।