श्रीलंका की संसद ने प्रधानमंत्री कार्यालय के व्यय को निलंबित करने के लिए गुरुवार को भारी बहुमत से एक प्रस्ताव पारित किया। यह एक विवादित फैसले के तहत राष्ट्रपति सिरिसेना द्वारा प्रधानमंत्री नियुक्त किए गए महिंदा राजपक्षे के लिए बड़ा झटका है। सिरिसेना के इस कदम से श्रीलंका सांविधानिक संकट से जूझ रहा है।
225 सदस्यों वाली श्रीलंकाई संसद में प्रस्ताव के पक्ष में सदन में मौजूद सभी 123 सदस्यों ने मतदान किया जबकि राजपक्षे के समर्थकों संसद सत्र का बहिष्कार किया। सिरिसेना की यूनाइटेड पीपुल्स फ्रीडम एलायंस (यूपीएफए) पार्टी एसबी दिसानायके ने कहा कि ऐसे किसी प्रस्ताव को विपक्ष द्वारा नहीं पेश किया जा सकता है। इसे केवल सरकार के किसी मंत्री द्वारा ही पेश किया जाना चाहिए।
विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रस्ताव के पारित होने से प्रधानमंत्री के सचिव राजकोषीय खाते से न सिर्फ पैसा खर्च नहीं कर पाएंगे बल्कि इससे यह भी संकेत मिलता है कि प्रधानमंत्री बने रहने के लिए राजपक्षे के पास 113 सदस्यों का साधारण बहुमत नहीं है।