फिलिस्तीन नेशनल अथॉरिटी (पीएनए) ने यूनिस्को वर्ल्ड हेरिटेज कमेटी से अल इब्राहिमी मस्जिद और शहर की पुरानी हेब्रोन को अंतरराष्ट्रीय विरासत स्थल के रूप में घोषित करने के लिए डिमांड करेगा। खबर के मुताबिक फिलिस्तीन ने ऐसा इसलिए कहा है क्योंकि इससे इजरायल पर फिलिस्तीन नियंत्रण क्षेत्र को ट्रांसफर करने के लिए भारी दबाव डाला जा सकेगा। यह इजरायली-फिलिस्तीनी के बीच संघर्ष के लिए भी एक कड़ी माना जा रहा है।
फिलिस्तीन नेशनल अथॉरिटी ने 1 जुलाई को होने वाली को क्राको, पोलैंड में संयुक्त राष्ट्र समिति (यूएन कमिटी) की वार्षिक बैठक में इस मुद्दे को उठाने लिए तय किया है। अल इब्राहिनी मस्जिद के प्रमुख हफ्जी अबू स्नेनहै ने ऐसी भविष्यवाणी की है कि यह कदम फिलिस्तीन को अंतरराष्ट्रीय एजेंडे में सबसे आगे ले जा सकता है।
पीएनए योजनाओं को तेजी से ट्रैक करने के लिए यूनेस्को नियमों में एक खंड का लाभ लेने की योजना बना रहा है। अबू स्नेनहा का कहना है कि मस्जिद और हेब्रोन इजरायली कब्जे वाले बल द्वारा विनाश का सामना कर रहा है। वह मस्जिदों का अधिग्रहण करने और शहर पर कब्जा जमाने के लिए व्यवस्थित योजनाओं को लागू कर रहा है। मामले में उन्होंने कहा कि अल इब्राहिनी मस्जिद पूरी तरह से मुस्लिमों की प्रापर्टी है इसलिए इस पर फिलिस्तीनी मुस्लिम कंट्रोल होना चाहिए।
संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक-वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन की विरासत समिति में फिनलैंड, पोलैंड, पुर्तगाल, क्रोएशिया, तुर्की, अजरबैजान, इंडोनेशिया, फिलीपींस, कोरिया, वियतनाम, कजाकिस्तान, ट्यूनीशिया, कुवैत, लेबनान, बुर्किना फासो, जिम्बाब्वे, अंगोला और तंजानिया सहित 21 सदस्य देश हैं। इजराइली यूनेट न्यूज साइट के अनुसार, समिति की रचना इजरायल के लिए नुकसानदायक है। विरासत स्थल घोषित करने के कदम का मुकाबला करने के लिए इजरायल को अपने पक्ष में कम से कम एक-तिहाई मतदान करने वाले देशों को जुटाना होगा। हालांकि इसे एक असंभव कार्य के रूप में देखा जा रहा है।