म्यांमार में रोहिंग्या मुस्लमानों के खिलाफ हिंसा अब धार्मिक मुद्दे से ऊपर उठ चुकी है। क्या मुस्लमान क्या हिंदू ... हिंसा करने वालों के निसाने पर हर कोई था, जो उनके सामने आ रहा था, ये कहाना है रोहिंग्या रिफ्यूजी कैंप में रहने वाली अखिरा धार का।
ये सब बताते हुए अखिरा धार की आंखें आंसू से भर गई। उन्होंने बड़ी ही मुश्किल से खुद को संभाला, लेकिन उनकी आखों के आगे उस रात का खौफनाक मंजर नजर आ रहा था। वहीं मंजर जिसमें धार के सामने ही उनके पति और घर वालों को बेदर्दी से मार दिया गया।
नकाबपोश बदमाशों ने उनके घर लूट लिए, पूरा का पूरा गांव जला दिया। गांव में कोई भी मर्द जिंदा नहीं बचा। अपनी कोख में चार महीने का बच्चा लेकर अखिरा किसी तरह से वहां से बच निकली। वह अब कुटुपालंग में हिंदू के लिए बने शिविर, हिंदूपारा में रह रही हैं।
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उन्होंने बताया कि बदमाश हिंदू महिलाओं के साथ रेप कर रहे थे। जब उन्हें यह बताया कि हम हिंदू हैं, तो भी वे नहीं रुके। गांव को जलाने से पहले वह हर महीला का रेप कर रहे थे।
हिंदूपारा में रह रही एक और शरणार्थी रिखा धार ने बताया कि म्यांमार के फकीर बाजार में उनकी ज्वेलरी शॉप थी। नकाबपोश बदमाशों ने उनके पति को डराया, धमकाया और जब उन्होंने कुछ नहीं बताया तो बच्चों को मारने की धमकी दी। जैसे ही धार के पति ने जेवरात के बारे में बताया, बदमाश उन्हें लेकर पहाड़ी की ओर चले गए।
रिखा धार ने बताया कि जब वो अपने बच्चों के साथ वहां ने निकल रही थी तो उनके पति की लाश सैकड़ों लाशों के बीच मिली ।