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शीतकालीन ओलंपिक में उत्तरी कोरिया के भाग लेने पर असमंजस

Fri, 01 Dec 2017 06:54 AM IST
देव प्रकाश चौधरी/ सियोल से
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उत्तर कोरिया के बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण के बाद वैश्विक राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। भारत के साथ सैन्य सहयोग बढ़ाने के लिए दक्षिण कोरिया ने भी कदम बढ़ा लिए हैं। दक्षिणी कोरिया का मानना है कि इसे लेकर बातचीत पर इस तनाव का कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा।
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उधर अमेरिका ने सभी देशों से उत्तर कोरिया के साथ राजनयिक और व्यापारिक संबंध समाप्त करने का आग्रह किया है। ऐसे में दक्षिण कोरिया में होने वाले शीतकालीन ओलंपिक में उत्तर कोरिया का खेलना संदेहास्पद ही है।

भारत ने हाल ही में दक्षिणी कोरिया से के-9 तोप खरीदने पर अपनी सहमति जताई है। अन्य सैन्य गतिविधियों पर बातचीत जारी है। दक्षिण कोरिया चाहता है कि उत्तर कोरिया से तनावपूर्ण रिश्ते के इस दौर में भारत उसके साथ रहे क्योंकि दोनों देश युद्ध नहीं, शांति चाहते हैं।
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अमेरिका भी उसके साथ है जिससे सियोल में लोगों के चेहरे पर विश्वास झलकता है। दक्षिण कोरिया के उप रक्षा मंत्री येओ सूक ने विदेशी पत्रकारों से कहा कि हम बनाना नहीं चाहते इसलिए हमारे पास परमाणु हथियार नहीं हैं। हमारे पारंपरिक हथियार ही काफी हैं और अमेरिका भी हमारे साथ है। 

अब सवाल है कि अगले साल फरवरी में प्योंगचेंग में होने वाले शीतकालीन ओलंपिक का कैसा माहौल रहेगा। 1988 के सोल ओलंपिक के दौरान उत्तर कोरिया ने दक्षिणी कोरिया के एक यात्री विमान को मार गिराया था, जिसमें दो भारतीय सहित 115 लोगों की जान चली गई थी।

हालांकि सूक ने भरोसा दिलाया है कि वैसा अब नहीं होगा। दक्षिण कोरिया अब किसी भी परिस्थिति में उत्तर कोरिया से निपटने के लिए तैयार है। सियोल में बृहस्पतिवार को  विदेशी पत्रकारों से बातचीत करते हुए इंटरनेशनल मीडिया रिलेशन की प्रमुख जीले ली ने कहा कि ओलंपिक में आने वाले मेहमानों का संख्या पर इस तनाव का कोई असर नहीं पड़ेगा, न ही टूरिस्ट कम होंगे।

 
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कोई नहीं चाहता कि इस खेल महाकुंभ में उत्तरी कोरिया भी हिस्सा ले

लेकिन क्या उत्तरी कोरिया खेल के इस महाकुंभ में शरीक होगा, इस सवाल पर ली ने कूटनीतिक अंदाज में कहा कि उत्तर कोरिया के दो खिलाड़ी आ सकते हैं, लेकिन हम लोग अभी तक उनके रजिस्ट्रेशन का इंतजार कर रहे हैं।

हालांकि सियोल में कोई नहीं चाहता कि इस खेल महाकुंभ में उत्तरी कोरिया भी हिस्सा ले। लोगों को एक डर यह भी है कि अगर दोनों देशों के बीच तनाव बना रहा तो इसका असर दूसरे देशों से आने वाले लोगों की संख्या पर होगा। लेकिन उप रक्षा मंत्री येओ सूक और इंटरनेशनल मीडिया रिलेशन की जीले ली बार-बार कह रहे हैं कि ऐसा नहीं होगा और यह आयोजन सफल रहेगा। 

खेल के इस आयोजन की तैयारियां चल रही हैं। सियोल में भारत के राजदूत विक्त्रस्म डोरास्वामी भी कहते हैं कि ऐसा कुछ नहीं होगा, डरने की जरूरत नहीं है। वह आने वाले समय में भारत और दक्षिणी कोरिया के रिश्तों को एक मजबूत बंधन में देख रहे हैं।

कहते हैं, ‘राजनीति और खेल के अलावा व्यापार का एक रिश्ता भी हाल के दिनों में दोनों देशों के बीच बढ़ा है। यहां बड़ी संख्या में भारतीय प्रोफेशनल नौकरी के लिए आ रहे हैं। उत्तरी और दक्षिणी कोरिया के बीच उपजा यह तनाव दोनों देशों के बीच के रिश्तों को कम नहीं कर पाएगा।’
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