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नेपाल में नई आपराधिक संहिता लागू होने से बवाल

Sat, 18 Aug 2018 05:40 AM IST
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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नेपाल के प्रधानमंत्री के. पी. शर्मा ओली।
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नेपाल की कम्युनिस्ट सरकार ने शुक्रवार को नई आपराधिक संहिता को हरी झंडी दे दी, जिसके तहत गोपनीय जानकारी प्रकाशित करना, बिना अनुमति के ऑडियो रिकॉर्ड करना या तस्वीरें लेना जेल जाने योग्य अपराध होगा। देश के सामाजिक कार्यकर्ताओं और पत्रकारों ने इस पर चिंता जाहिर की है और कहा है कि यह प्रेस की स्वतंत्रता में बाधक होगा।

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वकीलों व सामाजिक अधिकार कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि सरकार का यह कदम असहिष्णुता बढ़ाने वाला है, इससे असंतोष फैलेगा और सरकार अपनी आलोचना करने वालों को चुप करने के लिए इस कानून का इस्तेमाल कर सकती है।

सरकार का नया आपराधिक संहिता और आपराधिक प्रक्रिया संहिता देश के पुराने कानून मुलिकी ऐन की जगह लेगा। सरकार का मानना है कि इससे देश की कानूनी व्यवस्था सुधरेगी। जबकि इसमें ऐसे प्रावधान हैं जिससे प्रेस की स्वतंत्रता पर खतरा मंडराने लगा है।
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यह हैं प्रावधान
- किसी भी व्यक्ति के निजता के उल्लंघन करने पर तीन साल की जेल और हजारों रुपये जुर्माना होगा।

- दो या दो से अधिक लोगों के बीच वार्तालाप सुनना या रिकॉर्ड करना, या बिना किसी की सहमति से किसी भी व्यक्ति की तस्वीरें लेना अपराध होगा। इस जुर्म में एक साल की जेल और 10 हजार रुपये जुर्माना होगा।

- ऐसी रिपोर्ट प्रकाशित करना जो किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को सीधे या व्यंग्य के माध्यम से नुकसान पहुंचाए, अपराध माना जाएगा।

वरिष्ठ अधिवक्ता दिनेश त्रिपाठी का कहना है कि इस कानून का इस्तेमाल पत्रकारों का मुंह बंद करने और इंवेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग को हतोत्साहित करने के लिए किया जा सकता है।

नेपाल प्रेस यूनियन के अध्यक्ष बद्री सिगदल का कहना है कि यह संविधान का पूर्ण रूप से उल्लंघन है और इसका उद्देश्य प्रेस को नियंत्रित करना है, जो अस्वीकार्य है।

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