आर्थिक नाकेबंदी हटाने के लिए बल प्रयोग के दौरान भारतीय की मौत के बाद भारत और नेपाल के बीच नए सिरे से कूटनीतिक तनातनी शुरू हो गई है। इस घटना पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से चिंता जताए जाने के कुछ घंटे बाद ही नेपाल के मंत्री सत्यनारायण मंडल ने भारत की ओर से चोरी छिपे सेना भेजे जाने की आशंका जताकर दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनातनी को और बढ़ा दिया है।
इतना ही नहीं, नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने भारत को आंतरिक मामले में दखल न देने की चेतावनी देकर विवाद को हवा दे दी है। नेपाली पीएम ने लगे हाथ भारत पर आंदोलनकारी मधेसियों की मदद करने का भी आरोप लगा दिया है। बल प्रयोग पर भारत की नाराजगी के बावजूद नेपाल सरकार ने आंदोलनकारियों से भविष्य में भी सख्ती से निपटने का साफ संकेत दिया है।
भारत ने फिलहाल देखो और इंतजार करो की नीति पर चलने का संकेत दिया है। भारत को लगता है कि प्रवेश द्वार से आंदोलनकारियों को खदेड़ने के बावजूद भय के वातावरण के कारण ट्रकों को पहले की तरह भेजना आसान नहीं होगा।
भारत ने अपने दूतावास के माध्यम से नेपाल सरकार को संविधान पर उपजे असंतोष का बल प्रयोग के बदले सियासी समाधान निकालने की फिर से नसीहत दी है। इस दौरान भारत ने सीमा पर पुलिस कार्रवाई पर अपने देश के नेपाल से सटे इलाकों में असर पड़ने को लेकर भी साफ चिंता जाहिर की है।