सीपीएन यूएमएल के नेतृत्व वाले नेपाल के मुख्य विपक्षी गठबंधन ने सरकार पर संविधान संशोधन विधेयक को वापस लेने का दबाव बनाने के लिए आज राजधानी में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किए। इस विधेयक का उद्देश्य आंदोलनरत मधेसी पार्टियों की मांगों का समाधान करना है।
नेपाल कम्युनिष्ट पार्टी (एमाले) के अध्यक्ष केपी ओली ने कहा कि संविधान संशोधन प्रस्ताव राष्ट्र हित के विपरीत है और इसे किसी भी हालत में पारित नहीं होने दिया जाएगा। राजधानी में एमाले सहित नौ दलों के शक्ति प्रदर्शन के बाद आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए एमाले अध्यक्ष ओली ने यह बात कही। ओली ने कहा कि अत्यंत गंभीर षडयंत्र के साथ यहां के भाषा को विस्थापित करके हिन्दी को स्थापित करने के लिए संविधान संशोधन प्रस्ताव लाया गया है। लेकिन राष्ट्रहित के विपरीत इस संविधान संशोधन प्रस्ताव को पारित नहीं होने देंगे।
एमाले अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि पांच नवंबर को प्रदेश के विभाजन की मांग मधेशी जनता का न होकर बाहरी शक्ति द्वारा निर्देशित व्यक्तियों का है। ओली ने आगे कहा की वर्तमान सरकार संविधान कार्यान्वयन व निर्वाचन कराना छोड़कर सत्ता की आयु बढ़ा रही है। ओली ने कहा कि 11 महीने के भीतर निर्वाचन न होने पर देश में संवैधानिक संकट आ सकता है।
इस दौरान राजधानी के 40 जगहों में शामिल शक्ति प्रदर्शन में एमाले सहित नेपाल मजदूर किसान पार्टी (नेमकिपा), राष्ट्रीय जनमोर्चा, नेकपा माले, नेपाल परिवार दल, बहुजन शक्ति पार्टी, नेपाल राष्ट्रीय पार्टी, मधेस समता पार्टी और राष्ट्रीय जनमुक्ति पार्टी (लोकतांत्रिक) शरीक थे।