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नेटो ने अफ़ग़ानों को सौंपी फ़ौज की कमान

Tue, 18 Jun 2013 07:41 PM IST
नई दिल्ली
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अफ़ग़ानिस्तान में मौजूद नेटो सुरक्षा बलों ने औपचारिक तौर पर फ़ौजी अभियानों की कमान अफ़ग़ान सरकार को सौंप दी। इससे पहले राजधानी काबुल में हुए एक धमाके में तीन अफ़ग़ान कर्मचारी मारे गए और कई ज़ख़्मी हो गए हैं।
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नेटो सुरक्षा बलों ने अफ़ग़ानिस्तान के पूर्वी ज़िलों और कंधार की कमान अफ़ग़ान फ़ौजों को सौंपी। इस मौके पर हुए आयोजन में राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने सैन्य रणनीति में बदलाव का संकेत दिया।

नेटो के महासचिव एंडर्स फो रासमुसेन का कहना है कि उन्हें अभी 18 महीने और कड़ा संघर्ष करना है लेकिन मौजूदा कदम देश छोड़ने की दिशा में ही उठाया गया है हालांकि अभी कई सवालों के जवाब पाना बाकी है।
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करज़ई ने कहा कि अब से अफ़ग़ानों के घरों और गाँवों पर हवाई हमले नहीं होंगे। उनके मुताबिक आज से अफ़ग़ानों की अपनी सेना उनकी रक्षक होगी।

बीबीसी संवाददाता के मुताबिक फ़ौजी ऑपरेशनों की कमान के हस्तांतरण की ये कार्रवाई बड़े पैमाने पर प्रतीकात्मक ही है।

1989 में अफ़ग़ानिस्तान से सोवियत फ़ौजों की वापसी के बाद ये पहला मौका होगा जब देश की सुरक्षा पूरी तरह अफ़ग़ान सरकार के हाथों में सौंपी जा रही है। नेटो फ़ौजों की पूरी तरह देश से वापसी अगले साल के अंत तक मुमकिन हो पाएगी।

समारोह से पहले धमाका
इस बीच काबुल के बाहरी इलाके में मौजूद अफ़ग़ानिस्तान इंडिपेंडेंट ह्यूमन राइट्स कमीशन के दफ़्तर के बाहर ज़ोरदार धमाका हुआ। हमले के वक़्त इमारत के बाहर कई विदेशी अफ़सर मौजूद थे।

हमले में कमीशन के तीन कर्मचारियों के मारे जाने की ख़बर है जबकि छह कर्मी ज़ख़्मी हो गए। स्थानीय पुलिस प्रमुख अब्दुल वकील के मुताबिक हमले में एक पुलिस वाहन नष्ट हो गया है।

पुलिस अधिकारी ने बताया, "मैंने एक महिला को देखा जिसके पैरों से खून निकल रहा था। दूसरी घायल महिला को पुलिस ने अस्पताल पहुंचाया है। दो हथियारबंद गार्ड भी ज़ख्मी हुए हैं।"

बीबीसी संवाददाता के मुताबिक फिलहाल इस हमले का नेटो के समारोह से कोई संबंध साबित नहीं हुआ है। हालांकि हमलावर के निशाने पर एक बड़ा स्थानीय नेता था।

तालिबान का क़तर दफ़्तर खुलेगा?
उधर, बीबीसी के अफ़ग़ानिस्तान संवाददाता डेविड लॉयन के मुताबिक तालिबान जल्द ही क़तर की राजधानी दोहा में अपना दफ़्तर खोलने जा रहा है। इसे तालिबान के राजनीतिक चेहरे की तरह देखा जा रहा है।

बीबीसी संवाददाता के मुताबिक तालिबान ने ये क़दम अफ़ग़ान सरकार और तालिबान के बीच बातचीत के अमरीकी दबाव को देखते हुए उठाया गया है।

संवाददाता के मुताबिक तालिबान प्रतिनिधियों ने कहा है कि ये दफ़्तर खोलने का मतलब ये नहीं कि वो अफ़ग़ान सरकार से बातचीत करने वाले हैं। अफ़गान सरकार ने तालिबान के सामने अल क़ायदा से रिश्ते तोड़ने और अफ़ग़ान संविधान मानने की शर्त रखी है।

बीबीसी संवाददाता के मुताबिक हालात को देखते हुए तालिबान अफ़ग़ान सरकार के बजाय अमेरिका से बातचीत का इच्छुक है ताकि वो अपने छह बड़े नेताओं को रिहा करवा सके
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