संयुक्त राष्ट्र के एक अधिकारी ने कहा कि म्यांमार से रोहिंग्या मुसलमानों का सफाया किया जा रहा है। देश में रोहिंग्या मुसलमानों को व्यापक पैमाने पर भेदभाव और दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ रहा है। उनके साथ सामूहिक बलात्कार, हिंसा और हत्या की घटनाओं में इजाफा हुआ है।
उन्होंने कहा कि राखिन प्रांत में हिंसात्मक संघर्ष के बाद सैकड़ों की संख्या में रोहिंग्या मुसलमान भागकर बांग्लादेश जा रहे हैं। म्यांमार से अब तक 30000 से ऊपर लोग अपने घर छोड़कर विस्थापित हो चुके हैं।
बांग्लादेशी सीमावर्ती शहर कॉक्स बाजार में संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (यूएनएचसीआर) के प्रमुख जॉन मैककिसिस्क ने कहा कि म्यांमार की सेना पुरुषों की हत्या कर रही है, उन्हें शूट कर रहे हैं, बच्चों का कत्लेआम कर रहे हैं, महिलाओं के साथ बलात्कार कर रहे हैं, उनके घरों को लूटकर जलाया जा रहे हैं। नतीजतन हजारों रोहिंग्या मुसलमान नदी पार कर बांग्लादेश भाग रहे हैं।
ढाका ने तत्काल उन अंतरराष्ट्रीय अपीलों का विरोध किया है, जिसमें रोहिंग्या अल्पसंख्यकों पर हो रहे जुर्म को रोकने के लिए म्यांमार को कहने की बजाय इस मानवीय संकट को टालने के लिए बांग्लादेश से अपनी सीमा को खोलने के लिए कहा गया है।
मैककिसिस्क ने कहा, ‘बांग्लादेश सरकार के लिए यह कहना काफी कठिन है कि सीमा खुली है क्योंकि आगे अत्याचार जारी रखने के लिए यह म्यांमार की सरकार को प्रोत्साहित करेगा और वे तब तक उन्हें बाहर खदेड़ते रहेंगे जब तक कि म्यांमार में मुस्लिम अल्पसंख्यकों के जातीये सफाये के अपने लक्ष्य को हासिल नहीं कर लेते हैं।’