नोबेल पुरस्कार विजेता आंग सान सू की के भरोसेमंद हेतिन क्याव मंगलवार को म्यांमार के राष्ट्रपति चुने गए। म्यांमार में दशकों तक सैनिक शासन के बाद ऐसा पहली बार हुआ है जब एक गैर सैनिक पृष्ठभूमि का व्यक्ति देश का नेतृत्व संभालने जा रहा है। लोकतांत्रित तरीके से निर्वाचित 69 वर्षीय हेतिन क्याव को संसद के दोनों सदनों के कुल 652 में से 360 वोट मिले। दूसरे स्थान पर सेना द्वारा समर्थित उम्मीदवार मिंट स्वे को 213 वोट मिले। एक और अन्य उम्मीदवार हेनरी वैन थियो को 79 वोट मिले।
सू-की की पार्टी नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी ने नवंबर में हुए ऐतिहासिक चुनावों में शानदार जीत दर्ज की थी। इससे उनकी पार्टी को संसद के दोनों सदनों में बहुमत हासिल हुआ। चूंकि सू की को संवैधानिक प्रावधानों के तहत राष्ट्रपति बनने से रोक दिया गया था इसलिए अब क्याव के राष्ट्रपति बनने का रास्ता साफ हो गया है। क्याव ने कहा, ‘‘यह बहन आंग सान सू की की जीत है।’’ क्याव एक अप्रैल को राष्ट्रपति पद का कार्यभार संभालेंगे। वे सेना द्वारा समर्थित थेइन सेन की जगह लेंगे। हालांकि महत्वपूर्ण मंत्रालयों (गृह और रक्षा) पर नियंत्रण के साथ सेना म्यांमार में अपना दबदबा बनाए रखेगी।
पीएम मोदी ने दी बधाई
म्यांमार के पहले गैर सैनिक राष्ट्रपति के रूप में निर्वाचित होने के बाद हेतिन क्याव को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बधाई दी। प्रधानमंत्री मोदी ने उम्मीद जताई कि क्याव भारत और म्यांमार के संबंधों को और मजबूती देने की दिशा में मिलकर काम करेंगे।
हेतिन क्याव
पार्टी : नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी (एनएलडी)
जन्म : 20 जुलाई 1946
शिक्षा : 1962 में यंगून यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र स्नातक होने के बाद ऑक्सफोर्ड से डिग्री ली
विवाह : 1973 में सू सू ल्वीन से
क्याव खुद एक कवि हैं। उनके पिता मिन थू वून भी जाने-माने कवि और एनएलडी के समर्थक थे।
सू की के ड्राइवर की भूमिका भी निभाई
- सू की को जब कुछ दिनों के लिए आजाद किया जाता था तो क्याव उनके निजी ड्राइवर की भूमिका में होते थे।
- सू की जब म्यांमार में नजरबंद थीं तो उस दौरान जिन चंद लोगों को उनसे मिलने की इजाजत थी, उनमें से एक क्याव भी थे।
सू की नहीं बन सकती हैं राष्ट्रपति
भारी बहुमत के बावजूद सू की राष्ट्रपति नहीं बन सकती हैं। सेना ने संविधान में एक ऐसा नियम डाल दिया है जिससे वह इस पद के लिए अपात्र घोषित हो जाती हैं। इस नियम के मुताबिक जिस किसी के करीबी परिजनों में से एक भी विदेशी नागरिक हो तो वह राष्ट्रपति नहीं बन सकता। सू की के पति भी विदेशी नागरिक थे और उनके बेटों ने ब्रिटेन की नागरिकता ले रखी है।