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ऐसा देश जहां से भाग रहे मुस्लिम!

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एक वरिष्ठ मानवाधिकार कार्यकर्ता ने बीबीसी न्यूज को बताया है कि मजहबी हिंसा की वजह से सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक की समूची मुस्लिम आबादी को देश से भागना पड़ सकता है।
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मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच के आपात निदेशक पीटर बाउकर्ट का कहना है कि इसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है क्योंकि क़ारोबारी गतिविधियों पर मुसलमानों का नियंत्रण है।

देश में बीते साल तख़्ता पलट के बाद से ही बहुमत वाले ईसाई समुदाय और मुसलमानों के बीच हिंसा जारी है।

अभी तक दस लोगों की हत्या

पीटर बाउकर्ट का कहना है कि राजधानी बानगुई में हिंसा की वजह से हाल ही में कम से कम दस लोग मारे गए हैं।

पीटर का दावा है कि उन्होंने बानगुई में एक मुसलमान को फांसी पर लटकाते ख़ुद अपनी आंखों से देखा है।

फ्रांस की समाचार एजेंसी एएफपी का कहना है कि इस व्यक्ति के मज़हब को लेकर कुछ विवाद था।

हज़ारों मुसलमानों का पलायन

सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक में जारी हिंसा के कारण हज़ारों मुसलमानों को देश छोड़कर पड़ोसी कैमरून और चाड में शरण लेनी पड़ी है।

सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक, अफ्रीका के सबसे ग़रीब देशों में से एक है। मुसलमान सेलेका विद्रोहियों ने एक साल पहले सत्ता पर क़ब्ज़ा जमाया था, तभी से देश में अशांति का माहौल है।

विद्रोहियों के नेता माइकल जोटोडिया ने क्षेत्रीय शांति प्रक्रिया के तहत अंतरिम राष्ट्रपति के पद से पिछले महीने ही त्यागपत्र दे दिया था।

लेकिन इससे भी हिंसा थमी नहीं। अफ्रीकन यूनियन और फ्रांस के हज़ारों शांतिरक्षकों के दख़ल के बावजूद देश में हिंसक घटनाओं का दौर जारी है।

'सड़क पर जला दिया'

मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉट के आपात निदेशक पीटर बाउकर्ट बाते रविवार की एक घटना याद करते हुए बताते हैं कि सुबह का वक्त था और राजधानी बानगुई के मुसलमान आबादी वाले इलाके से तेज़ धमाके की आवाज़ें आ रही थीं।

पीटर कहते हैं, ''जब हम पड़ताल के लिए पहुंचे तो देखा कि सड़क पर ही शव जल रहा था। हमारे देखते ही देखते उन्होंने एक और मुसलमान को पकड़ा और फांसी पर लटका दिया।''

जमकर हो रही है लूटपाट

पीटर कहते हैं, ''मुस्लिम आबादी वाले इलाकों से मुसलमानों को पूरी तरह से खदेड़ दिया गया है। उनके घर, छत, दीवार, खिड़की हर चीज़ को गिराया जा रहा है। यहां से उनका नामो-निशान मिटाया जा रहा है।''

मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच के अधिकारियों के मुताबिक़, रवांडा के सैनिकों ने उन्होंने बताया है कि सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक के मौजूदा हालात उनके अपने देश में दो दशक पहले हुए नरसंहार की 'ख़ौफ़नाक स्मृतियों' को ताज़ा कर रहे हैं।
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युद्ध-अपराधों की जांच

अंतरराष्ट्रीय आपराधिक अदालत की प्रमुख वक़ील फटोउ बेनसोउदा का कहना है कि उन्होंने सेंट्रल अफ्रीकन गणराज्य में संभावित युद्ध-अपराधों की शुरुआती जांच आरंभ कर दी है।

उनका कहना है कि उन्हें यहां 'विभिन्न समूहों द्वारा चरम बर्बरता' की ख़बरें मिलीं हैं।

जन-कल्याणकारी संस्था मेडिसिन्स सेन्स फ्रंटियर्स (एमएसएफ) का कहना है कि हिंसा की वजह से यहां सभी समुदाय प्रभावित हुए हैं लेकिन बाद में सभी समुदायों ने मिलकर मुसलमानों को निशाना बनाया है।

एमएसएफ के मुताबिक़, लगभग 30,000 शरणार्थी पहले ही चाड पहुंच चुके हैं जबकि और 10,000 कैमरून जा पहुंचे हैं।
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