मिस्र की राजधानी काहिरा में राष्ट्रपति भवन के बाहर राष्ट्रपति मोर्सी के समर्थकों और विरोधियों के बीच फिर झड़पें हुई हैं। मोर्सी के समर्थकों ने विरोधी पक्ष के टेंट उखाड़ डाले।
संविधान के मसौदे और मोर्सी के नए अधिकार ग्रहण करने के खिलाफ हज़ारों लोग राष्ट्रपति भवन के सामने धरना दे रहे हैं। इस दौरान पेट्रोल बम फेंके गए और कई लोग घायल भी हो गए।
इस बीच उप राष्ट्रपति महमूद मेकी ने कहा है कि संविधान के मसौदे पर 15 दिसंबर को ही मतदान होगा। लेकिन उन्होंने ये संकेत भी दिया कि संविधान में संशोधनों पर वोटिंग के बाद विपक्ष के साथ समझौता हो सकता है। उप राष्ट्रपति ने विरोधियों से कहा कि वे अपनी चिंताएँ लिखित में दें ताकि इन पर भविष्य में चर्चा हो सके।
आलोचकों का कहना है कि ठीक तरीके से चर्चा किए बगैर संविधान का मसौदा संसद में रखा गया और अल्पसंख्यकों और महिलाओं के अधिकारों के लिए इसमें पर्याप्त अधिकार नहीं हैं।
विपक्ष एकजुट
नवंबर में राष्ट्रपति मोर्सी ने एक आदेश के तहत बहुत सारे अधिकार अपने अधीन कर लिए थे जिससे लोग पहले से ही नाराज़ थे। संविधान के मसौदे से लोगों की नाराज़गी और बढ़ गई है।
कल यानी बुधवार को मुस्लिम ब्रदरहुड के समर्थकों ने राष्ट्रपति भवन के सामने रैली की थी। ये लोग मोर्सी के पक्ष में नारे लगा रहे थे। वहां गोलीबारी होने की ख़बरे हैं। समाचार एजेंसी एएफपी के मुताबिक मोर्सी विरोधी लोग इलाके से चले गए हैं।
उधर एक संयुक्त पत्रकार वार्ता में मोहम्मद एलबारादेई, अम्र मूसा और विपक्षी दल के नेताओं ने कहा है कि हिंसा के लिए मोर्सी दोषी हैं।
राष्ट्रपति पद के पूर्व उम्मीदवार हमदीन सबाही ने कहा है कि बारादेई की अगुआई में विपक्ष लड़ेगा। उनका कहना था, “हम ऐसे संविधान पर वोट नहीं करेंगे जिसका मसौदा तैयार करने में लोगों की भागीदारी नहीं थी। ये फासीवाद है।”
मोर्सी के दो सलाहकारों ने बुधवार को इस्तीफा दे दिया था। तीन सलाहकार पिछले हफ्ते ही पद छोड़ चुके हैं।