मनसा मूसा के दौर की जो सबसे मशहूर कहानी है वो है उनकी मक्का यात्रा. ये 1324 की बात है. इस सफ़र में मनसा मूसा ने साढ़े छह हज़ार किलोमीटर का फासला तय किया था। किस्सा ये है कि जो लोग मनसा मूसा को देखना चाहते थे, जब वे उनके कारवां के पास पहुंचे तो अवाक् रह गए। लोगों ने देखा कि मनसा मूसा के कारवां में 60 हजार लोग शामिल थे और इनमें 12 हज़ार तो केवल सुल्तान के निजी अनुचर थे। मनसा मूसा जिस घोड़े पर सवार थे, उससे आगे 500 लोगों का दस्ता चला करता था जिनके हाथ में सोने की छड़ी होती थी। मनसा मूसा के ये 500 संदेशवाहक बेहतरीन रेशम का लिबास पहना करते थे।
इनके अलावा इस कारवां में 80 ऊंटों का जत्था भी रहता था, जिस पर 136 किलो सना लदा होता था. कहा जाता है कि मनसा मूसा इतने उदार थे कि वे जब मिस्र की राजधानी काहिरा से गुजरे तो वहां उन्होंने गरीबों को इतना दान दे दिया कि उस इलाके में बड़े पैमाने पर महंगाई बढ़ गई। मनसा मूसा की इस यात्रा की वजह से उनके दौलत के किस्से यूरोपीय लोगों की कान तक पहुंचे। यूरोप से लोग सिर्फ ये देखने के लिए उनके पास आने लगे कि उनकी दौलत के बारे में जो कहा जा रहा है वो किस हद तक सच है।
मनसा मूसा की दौलत की जब पुष्टि हो गई तो उस वक्त के महत्वपूर्ण नक्शे कैटलन एटलस में माली सल्तनत और उसके बादशाह का नाम शामिल किया गया। 14वीं सदी के कैटलन एटलस में उस वक्त की उन तमाम जगहों का वर्णन है जो यूरोपीय लोगों को मालूम थी। मनी मैगजीन में यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन के इतिहास के प्रोफ़ेसर रुडोल्फ वेयर कहते हैं, "ये इतिहास के उस सबसे अमीर आदमी की बात है। जब आपके पास इतनी दौलत हो कि उसका अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाए तो ये समझिए कि आप बहुत अमीर आदमी हैं।"