नेपाल की मधेसी पार्टियों ने प्रचंड के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता किया है, जिसके तहत संशोधित संविधान संशोधन विधेयक के फास्ट ट्रैक प्रक्रिया के जरिए संसद में पास होने के बाद वे स्थानीय चुनाव में शिरकत करेंगे। इससे पहले मधेसी दलों ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा था कि संसद में आनुपातिक प्रतिनिधित्व समेत उनकी सभी मांगों को पूरा नहीं किया गया तो वे स्थानीय चुनाव प्रक्रिया को बाधित करेंगे।
मधेसी दलों और जातीय समूहों के गठबंधन संविधान संशोधन और स्थानीय चुनाव से संबंधित मसले पर एक समझौते को राजी हुए। इसके बाद मधेसी पार्टियां और सरकार के प्रतिनिधि संशोधित संविधान संशोधन विधेयक को संसद में पास करने के लिए फास्ट ट्रैक प्रक्रिया अपनाने और दो चरणों में स्थानीय चुनाव कराए जाने पर सहमत हो गए। प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा जारी बयान में कहा गया कि सरकार ने दो चरणों में स्थानीय निकाय चुनाव कराने के लिए दो तिथियां 14 मई और 14 जून निर्धारित की हैं।
सरकार के प्रवक्ता और सूचना एवं संचार मंत्री सुरेंद्र कुमार कार्की ने कहा कि पहले चरण में पूर्व निर्धारित 14 मई को प्रदेश नंबर 3, 4 और 6 में निर्वाचन होगा। जबकि दूसरे चरण में 14 जून को प्रदेश नंबर 1, 2, 4 और 7 में स्थानीय चुनाव कराए जाएंगे। सहमति बनने पर सरकार ने मधेसी दलों से आंदोलन वापस लेने को कहा है।
उधर, संघीय गठबंधन के वरिष्ठ नेता राजेंद्र महतो ने साफ किया है कि संसद में संशोधित संविधान संशोधन विधेयक पास होने के बाद ही गठबंधन स्थानीय निकाय चुनाव में हिस्सा लेगा। इससे पहले रविवार सुबह प्रधानमंत्री प्रचंड ने मुख्य चुनाव आयुक्त अयोधी प्रसाद यादव और मुख्य विपक्षी नेता और सीपीएन-यूएमएल के प्रमुख केपी शर्मा ओली के साथ स्थानीय चुनाव और संविधान संशोधन से संबंधित मसलों पर विचार-विमर्श किया।