वैज्ञानिकों के मुताबिक, "ये तब होता है जब तारे के गर्म भीतरी भाग की वजह से उससे निकली गैस और धूल 10,000 साल तक चमकती है। ये खगोल विज्ञान में एक छोटी सी अवधि है।" "ऐसा होने से प्लैनेटरी नेबुला दिख पाता है। कई नेबुला तो इतने चमकीले होते हैं कि उन्हें लाखों प्रकाश वर्ष की दूरी से भी देखा जा सकता है।" मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी के एल्बर्ट जिज्लस्ट्रा ने कहा, "ना सिर्फ हम करोड़ो साल पुराने तारे की मौजूदगी का पता लगा सकते हैं, बल्कि अब हमने ये भी खोज लिया है कि मरते वक्त सूरज क्या करेगा।" स्टडी पूरी होने से पहले तक वैज्ञानिकों को पक्के तौर पर नहीं पता था कि सूरज के साथ भी ऐसा होगा।
दशकों की बहस
यह समझने के लिए की सूरज के साथ क्या होगा, खगोलविदों की टीम ने एक नया डेटा मॉडल विकसित किया है। ये डेटा मॉडल अलग-अलग वजन और उम्र वाले सितारों से निकलने वाली चमक की भविष्यवाणी करता है। ये नया मॉडल इकट्ठा किए हुए डेटा और पूर्वानुमानित वैज्ञानिक मॉडल के बीच के अंतर्विरोधों पर रोशनी डालने का काम करता है। एल्बर्ट कहते हैं, "आंकड़ें बताते हैं कि सूरज जैसे कम वजन वाले तारों से भी आपको चमकीला प्लैनेटरी नेबुला मिल सकता है।" "इससे पहले वाले मॉडल्स कहते थे कि ऐसा नहीं हो सकता। उनका मानना था कि कम से कम सूरज के वजन से दुगना तारा ही दिखने लायक प्लैनेटरी नेबुला बना सकता है।"
कमजोर लेकिन चमकीला
अब ये पता चल चुका है कि तारों की मौत के दौरान जब उसमें से गैस और धूल निकलती है तो वो पहले के अनुमान से तीन गुना ज्यादा गर्म हो जाता है। यही वजह है कि सूरज जैसा कम वजन वाला तारा भी चमकीला प्लैनेटरी नेबुला बना जाता है।
वैज्ञानिकों ने पता लगाया है कि सूरज कम वजन वाला तारा है। फिर भी वो दिख सकने वाला प्लैनेटरी नेबुला बना सकता है। हालांकि वो बेहद कमजोर भी है। आखिर में एल्बर्ट कहते हैं, "इस खोज के नतीजे बेहतरीन है। अब ना सिर्फ हम दूर की सौर गंगाओं में मौजूद लाखों साल पुराने कुछ तारों के बारे में पता लगाने का तरीके जानते हैं, बल्कि अब तो हमने ये भी खोज लिया है कि जब सूरज मरेगा तो वो क्या करेगा।