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CPEC पर भारत-चीन फिर आमने-सामने, जानें इससे जुड़ी अहम बातें

Tue, 16 Aug 2016 04:53 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
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पाकिस्तान-चीन इक्नॉमिक कॉरिडोर - फोटो : Getty
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विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की ओर से चीन-पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) को लेकर चिंता जाए जाने के बाद चीनी मीडिया ने प्रतिक्रिया दी है।
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चीन के सरकारी मीडिया ने लिखा है कि भारत के विरोध से CPEC प्रोजेक्ट को कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है। आइए जानते हैं क्या है CPEC और यह क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
 
CPEC प्रोजेक्ट के तहत इंफ्रास्ट्रक्चर और एनर्जी प्रोजेक्ट का काम चल रहा है। इनकी लागत 46 अरब डॉलर है।
 
CPEC के तहत चीन के पश्चिमी और पाकिस्तान के दक्षिणी इलाके को जोड़ा जाएगा।

2015 में शुरू हुए इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत 3,000 किमी सड़कें और रेल नेटवर्क के साथ पाइपलाइन बिछाने का भी कार्य किया जाना है।
 
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पाकिस्तान प्रधानमंत्री नवाज शरीफ - फोटो : Getty
CPEC तीन जीओ-पॉलिटिकल महत्वपूर्ण प्रांतों से गुजरेगा। दरअसल बलूच नेता पाक-चीन के इकनॉमिक कॉरिडोर का विरोध कर रहे हैं। यह कॉरिडोर विरोध झेल रहे ब्लूचीस्तान,  गिलगित-बाल्टिस्तान और पाक अधीकृत कश्मीर (पीओके) से गुजरेगा।

जानकारी के अनुसार पाकिस्तान को CPEC में इनवेस्ट करने से आर्थिक तौर पर मजबूती मिलेगी।

पाकिस्तान और चीन के एक उपग्रह का उपयोग कर CPEC परियोजनाओं पर हुई प्रगति की निगरानी करेंगे जोकि 2018 में लॉन्च की जाएगी.

बलूच और पीओके नागरिकों में पाकिस्तान और चाइना के खिलाफ खासी नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि उनके नेचुरल स्रोतों का शोषण किया रहा है साथ ही इसका उन्हें काई फायदा नहीं हो रहा है।

इस प्रोजेक्ट की वजह बलूच नागरिकों में चीनीयों के प्रति कम गुस्सा नहीं है. इसी के चलते पाकिस्तान ने चीनियों की सुरक्षा के लिए 17 हजार पाक सैनिकों को तैनात करने का फैसला लिया है।
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