आमतौर पर हर छोटी-बड़ी बीमारी के लिए लोग झट से एंटीबायोटिक ले लेते हैं। लेकिन अब डॉक्टरों ने इन दवाओं को लेकर लोगों को आगाह किया है। डॉक्टरों का कहना है कि एंटीबायोटिक के प्रति प्रतिरोधक क्षमता या रिज़िसटेंस पैदा हो रही है जो सेहत के लिए सबसे बड़े खतरों में से एक है। ये चेतावनी इंग्लैंड की मुख्य चिकित्सा अधिकारी और हेल्थ प्रोटेक्शन एजेंसी नाम की संस्था ने दी है।
इनका कहना है कि छोटे-मोटे संक्रमण के लिए भी एंटीबायोटिक का बेवजह इस्तेमाल हो रहा है जिससे बैक्टीरिया इनके प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर रहे हैं। डॉक्टरों ने मरीज़ों को सलाह दी है कि वे दवाओं का सेवन ज़रा सोच समझ कर करें, खा़सकर तब जब बहुत कम नई एंटीबायोटिक दवाएँ विकसित हो रही हैं।
लापरवाही न बरतें
ब्रिटेन की डॉक्टर सैली डेविस कहती हैं, “जिस स्तर और दर से एंटीबायोटिक दवाएँ अपना असर खो रही हैं वो चिंता का विषय है और इस असर को बदला नहीं जा सकता। एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति बैक्टीरिया तेज़ी से प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर रहे हैं। बाद में दवाओं का इन बैक्टीरिया पर कोई असर नहीं होगा।”
इंग्लैंड की मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने एंटीबायोटिक के इस्तेमाल को लेकर हिदायतें जारी की है। इसमें कहा गया है कि एंटीबायोटिक तभी लेनी चाहिए जब प्रशिक्षित डॉक्टर ने कहा हो। डॉक्टर ने जितनी दिनों की दवाई दी हो, उतने ही दिन दवा लेनी चाहिए, भले ही आप बेहतर महसूस कर रहे हों क्योंकि बीच में दवाई छोड़ने से बैक्टीरिया प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर सकते हैं।
ये भी कहा गया है कि ज़ुकाम या फ्लू जैसे वायरसों से होने वाले संक्रमण में एंटीबायोटिक मददगार नहीं होते। अकसर देखा गया है कि लोग जब ज़ुकाम या फ्लू से परेशान होते हैं तो वे एंटीबायोटिक लेने में ज़रा भी देर नहीं करते।