कंबोडिया के प्रसिद्ध अंकोरवाट मंदिर के परिसर के संरक्षण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले एक जापानी इतिहासकार इस वर्ष के मैगसेसे पुरस्कार विजेता लोगों में शामिल हैं। 79 वर्षीय योशिआकी इशीजावा 12 सदी एक इस प्राचीन मंदिर के परिसर के संरक्षण के लिए दशकों से प्रयासरत रहे हैं।
अवार्ड फाउंडेशन ने कहा कि वर्षों तक युद्ध और नागरिक संघर्ष का गवाह रहे इस देश में मंदिर परिसर के संरक्षण का कार्य बेहद कठिन था, लेकिन इशीजावा ने इसे बचाने का प्रयास नहीं छोड़ा। इस दौरान उन्होंने इंडोनेशिया में इस ऐतिहासिक इमारत के संरक्षण के लिए लोगों को भी जागरूप किया। मैगसेसे पुरस्कार को एशिया का नोबल भी कहा जाता है।
वहीं श्रीलंका की 83 वर्षीय तमिल मनोवैज्ञानिक परामर्शदाता गेट्सी शानमगम ने भी मैगसेसे पुरस्कार अपने नाम किया। उन्होंने श्रीलंका में हिंसा और आपदाओं से पीड़ित लोगों, विशेषतौर से महिलाओं और बच्चों को इन बुरी यादों से छुटकारा दिलाने व जीवन को सरल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने 2004 में सुनामी पीड़ितों का भी जीवन के प्रति मनोबल बढ़ाया।
इनके अलावा फिलीपीन के दिवंगत तानाशाह राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस के खिलाफ आवाज उठाने वाले, दक्षिणपूर्व एशियाई देशों में एचआईवी-एड्स और लिंग भेदभाव के खिलाफ लोगों को कला के माध्यम से जागरूप करने वाले ‘द् फिलीपीन एज्युकेशन थियेटर एसोसिएशन’ ने भी मैगसेसे पुरस्कार प्राप्त किया।
इसके अलावा इंडोनेशिया के 53 वर्षीय एबडोन नबाबन ने अपने देश के नागरिकों के अधिकार के लिए लड़ने, सिंगापुर के 70 वर्षीय टोने टे ने विलिंग हार्ट नामक चैरिटी संस्था के माध्यम से गरीबों की मदद करने के लिए मैगसेसे पुरस्कार जीता।