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चीन से मुकाबला करेगा जापान

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जापान के प्रधानमंत्री शिंजो एबे ने कहा है कि अन्य देश चाहते हैं कि एशिया में चीन की बढ़ती ताकत के खिलाफ जापान एक ज्यादा प्रभावी अग्रणी भूमिका निभाए।
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हालांकि उन्होंने उन देशों के नाम नहीं लिए हैं जिनका वो ज़िक्र कर रहे थे।

द वॉल स्ट्रीट जर्नल से बातचीत में एबे ने कहा कि ऐसी चिंताएं हैं कि ‘‘चीन वस्तुस्थिति को क़ानून के बजाय बल-प्रयोग से बदलने की कोशिश कर रहा है।’’

पिछले कुछ सालों के दौरान चीन और जापान के बीच संबंधों में तनाव आया है। शनिवार को चीन ने कहा कि अगर जापान ने चीन के ड्रोन विमानों को निशाना बनाया तो वह इस गतिविधि को युद्ध की कार्यवाई समझेगा।

तनाव

चीन की तरफ़ से ये बयान उन ख़बरों के मद्देनज़र आया था जिसमें कहा गया था कि जापानी प्रधानमंत्री ने उन रक्षा योजनाओं को सहमति दी है जिनमें जापानी हवाई क्षेत्र में आने वाले चीन के मानवरहित ड्रोन विमानों को मार गिराना भी शामिल है।
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दोनों देशों के बीच एक अन्य विवादास्पद मुद्दा एक द्वीपसमूह भी है।

पूर्वी चीनी सागर में स्थित इस द्वीप समूह पर टोकियो का नियंत्रण है लेकिन चीन इस पर अपना दावा करता है।

हालांकि जानकार कहते हैं कि तनाव का असल मुद्दा क्षेत्रीय ताक़त के स्वरूप में आया बदलाव है। जहां चीन ज़बरदस्त आर्थिक और कूटनीतिक सफलताएं हासिल कर रहा है वहीं जापान दो दशक लंबे आर्थिक धीमेपन से जूझ रहा है।
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चीन ने इस क्षेत्र में जापानी राष्ट्रवाद फैलाने के ख़िलाफ़ चेतावनी दी है जहां जापान के साम्राज्यवादी विस्तार की कड़वी यादें अब भी ताज़ा हैं।

अपने साक्षात्कार में शिंज़ो एबे ने कहा है कि उन्होने ऐसा महसूस किया है कि ‘’जापान से उम्मीदें हैं कि वह एक अगुआ की भूमिका निभाएगा ना सिर्फ़ आर्थिक मोर्चे पर बल्कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा के पहलू पर भी।’’
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