जापान में रेलवे स्टेशनों पर होने वाले खुदकुशी के मामलों को रोकने में सरकार ने बड़ी सफलता हासिल की है। रेलवे स्टेशन पर आत्महत्या करने के लगातार बढ़ रहे मामलों को देखते हुए वहां के प्रशसान ने एक नया प्रयोग करते हुए 70 से ज्यादा रेलवे प्लेटफॉर्म और क्रॉसिंग्स पर नीले रंग की एलईडी लाइट लगवाईं। इसका एकदम नए प्रयोग का नतीजे बहुत सकारात्मक निकला। पिछले 10 सालों के दौरान आत्महत्या के मामलों में 84 फीसदी तक की कमी आ गई। सरकार ने एक बारे में पिछले हफ्ते एक रिपोर्ट जारी की।
नीले रंग की एलईडी ही क्यों लगवाई?
इस नए प्रयोग के बाद यह सवाल लोगों की उत्सुकता बढ़ता है कि आखिर जापान की सरकार ने रेलवे स्टेशनों पर नीले रंग की एलईडी लाइट्स लगवाने का फैसला क्यों किया। तो इसका जवाब यह है कि साल 2013 में वैज्ञानिकों को एक शोध के बाद ये पता चला था कि नीले रंग की रोशनी से इंसानों को काफी सुकून मिलता है। इससे प्रभाव से इंसानों को तुरंत शांति महसूस होने लगती है।
ब्रिटेन भी जापान की राह पर
वैज्ञानिकों ने यह पाया कि दिमागी तनाव से जूझ रहे लोग अगर कुछ समय नीली रोशनी से भरे कमरे में बिताते हैं, तो उनका मन शांत हो जाता है। जापान में आत्महत्या के मामलों में आई कमी के बाद अब ब्रिटेन भी अपने यहां इसी प्रयोग को दोहराएगा। ब्रिटेन के रेलवे स्टेशन और गेटविक एयरपोर्ट पर भी नीली लाइट्स लगाई जा रही हैं।
नीली रोशनी का हल्का असर भी
जापान की वासेडा यूनिवर्सिटी की वैज्ञानिक और नीले रंग की रोशनी पर शोध कर रहीं मिचिको यूएड़ा का है कि नीली रोशनी के कारण आत्महत्या की मामलों को कम करने में कारगर है। साथ ही उनका मानना है कि नीली रोशनी का हमारे शरीर पर हल्का असर होता है। इस बारे में वे और अध्ययन कर रही हैं। उनका ये भी मानना है कि कुछ दिनों बाद जब लोग नीली रोशनी के आदी हो जाएंगे, तो इसका असर खत्म हो जाएगा।
जापान में खुदकुशी की औसत दर बहुत ज्यादा
शोध करने वाले वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर जापान में नीली रोशनी लगाने से खुदकुशी के मामले कम हुए हैं, तो यह कोशिश जारी रहनी चाहिए। जापान में खुदकुशी की औसत दर बहुत ज्यादा है। पिछले 15 साल में जापान में खुदकुशी के मामलों में कमी आती देखी गई है। साल 2003 में 34 हजार 500 लोगों ने आत्महत्या की थी। वहीं साल 2017 में ऐसी घटनाएं कम होकर 21 हजार हो गई।
प्लेटफॉर्म पर नीली रोशनी सस्ता सौदा
रेलवे स्टेशन पर नीली रोशनी की परियोजना पर काम कर रही मिचिको यूएड़ा का मानना है कि प्लेटफॉर्म पर बैरियर और केवल ट्रेन के आने पर खुलने वाले दरवाजे लगाए जाएं, तो ये खुदकुशी रोकने में ज्यादा कारगर होंगे। लेकिन इन्हें लगाने का खर्च इतना ज्यादा है कि रेलवे कंपनियां इस सुझाव को नहीं मानेंगी। वहीं प्लेटफॉर्म पर नीली रोशनी लगाना सस्ता सौदा है।
'लेकिन मैं दरवाजा लगाने की सलाह देती हूं'
मिचिको ने जब से अपना रिसर्च प्रकाशित किया है तब से दुनियाभर से उनके पास फोन आते हैं। वे कहती हैं कि, 'जब भी मुझसे कोई विकल्प के बारे में पूछता है, तो मैं नीली रोशनी के बजाए दरवाजे लगाने की सलाह ही देती हूं।'