दिन में पांच वक्त मस्जिदों पर लगे लाउड स्पीकर से गूंजती मुअज्जिन (मौलवी) की अजान कुछ लोगों के लिए इबादत थी तो कुछ लोगों के लिए ध्वनि प्रदूषण का हिस्सा थी। कई शिकायतों के बाद इस्राइल सरकार ने कड़ी कार्रवाई की योजना बनाई है। योजना के तहत मस्जिदों पर लाउड स्पीकर लगाने को इसी सप्ताह प्रतिबंधित किया जा सकता है। इसे लेकर दूसरे समुदाय के लोग उत्तेजित हैं।
प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के प्रस्तावित समर्थन से उनके मंत्रियों द्वारा इस सप्ताह सरकार को मस्जिदों व अन्य इबादतगाहों पर लाउड स्पीकर प्रतिबंधित करने के लिए अधिकृत कर दिया जाएगा। इससे देश के दोनों संप्रदायों में जबरदस्त उत्तेजना फैल सकती है। नए प्रतिबंधों के बारे में बताते हुए सांसद मोती योगेव ने कहा कि ‘इस्लाम में अल-सुबह सूर्योदय से पहले प्रार्थना (अजान) होती है। अत: इस कानून का लक्ष्य लोगों की नींद खराब होने से रोकना है। इसके अलावा मुस्लिमों की इबादत से हमें कोई नुकसान नहीं है।’ लॉड शहर की मस्जिद के इमाम आदिल अल्फार ने कहा कि इस्लाम में इबादत का यही तरीका है, जो पिछले 1,426 वर्षों से वजूद में है।
श्री नेतन्याहू के मंत्रियों ने रविवार को ही यह प्रस्तावित प्रतिबंध इस्राइली संसद को भेज दिया है। इस प्रस्ताव की जार्डन और फलस्तीन प्राधिकार द्वारा निंदा की गई है। इस प्रस्ताव की जटिलताओं के कारण विपक्ष भी आश्चर्य में है। देश के स्वास्थ्य मंत्री ने मंगलवार को संसद की बहस बीच में ही रोकते हुए इसे दोबारा मंत्रियों के पास भेज दिया है क्योंकि इससे यहूदियों की पूजा भी प्रभावित हो सकती है। दरअसल यहूदी लोग हर दो माह में अपने वाहनों पर लाउड स्पीकर लगाकर धर्म का प्रचार करते हैं, और इस प्रस्ताव के पास होने के बाद यह भी रोकना होगा।
फैसले के खिलाफ विरोध के सुर
इस्राइली संसद में अरब सांसद और नेता अहमद तिबी ने कहा कि नेतन्याहू ने मुस्लिम विरोधी आग सुलगाने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि सभी मुस्लिमों को मस्जिदों की सुरक्षा के लिए एकजुट हो जाना चाहिए। तिबी ने कहा कि इस फैसले के खिलाफ लोग भड़क भी सकते हैं।
इस्राइली शहरों में करीब 20 फीसदी लोग अरब मूल के हैं, जबकि लॉड की 73,000 आबादी में अरब लोगों की संख्या करीब एक तिहाई है। गाजापट्टी में रहने वाले फलस्तीन लोगों के साथ चल रहे संघर्ष के बीच इस प्रतिबंध को सामाजिक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।