इराक और सीरिया में खिलाफत का ऐलान करने वाले आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) के सरगना अबू बकर अल बगदादी के मारे जाने की खबरें हैं। हालांकि, बगदादी के मारे जाने की खबरों की पुष्टि नहीं हो पाई है।
बताया जा रहा है कि बगदादी समेत आईएस के कई बडे़ आतंकी शनिवार को पश्चिमोत्तर इराक में हुई एक बैठक में उस समय जमा हुए थे, जब अमेरिका की अगुवाई वाले गठबंधन ने उन पर ताबड़तोड़ हवाई हमलों को अंजाम दिया।
इराकी अधिकारियों का कहना है कि हमले में आईएस के कई बड़े आतंकी इन हमलों में मारे गए हैं। फिलहाल, इराक सरकार बगदादी के मारे जाने की खबरों की जांच कर रही है।
एक इराकी सुरक्षा अधिकारी और एक सैन्य कमांडर ने कहा कि अनबार प्रांत में कायम टाउन के पास आईएस की बैठक हो रही थी, जब उन पर अमेरिकी हवाई हमले हुए। यह इलाका सीरिया के सीमावर्ती कस्बे बुकामल के पास है।
इराक और सीरिया के इस रेतीले इलाके पर आईएस का कब्जा है, जहां उसी की हुकूमत चलती है। बताया जा रहा है कि हमले में बगदादी भी या तो बुरी तरह जख्मी हुआ है या फिर मारा गया है।
कई बडे़ आतंकियों की मौत की अफवाह
हालांकि, अधिकारी इस बात की पुष्टि नहीं कर पाए कि बगदादी इस बैठक में मौजूद था या नहीं। रक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी ने गठबंधन बलों द्वारा आईएस की बैठक पर किए गए हवाई हमलों की पुष्टि की।
अधिकारी ने यह भी बताया कि हमले में इसके अलावा आईएस के दस ट्रकों के काफिले को भी नष्ट कर दिया गया। उधर जब ये हमले किए जा रहे थे, उसके बाद ही अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने इराक में 1500 सैनिकों को भेजे जाने को मंजूरी दी थी, जो वहां अपनी गैर लड़ाकू भूमिका में आईएस के खिलाफ लड़ रहे इराकी सैनिकों और कुर्दिश बलों को प्रशिक्षण और सहायता देंगे।
आईएस के दो कमांडर मारे गए
इराकी अधिकारियों ने बताया कि इन हमलों में आईएस के दो क्षेत्रीय कमांडरों समेत कई आतंकी मारे गए हैं। इनमें अनबार प्रांत का वली (शासक) अबू मुहन्नद अल स्वेदावी और सीरिया में दीर अल जाउर प्रांत का वली अबू जाहरा अल मुहम्मदी है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इन हमलों में बडे़ पैमाने पर मारे गए आतंकियों की वजह से आईएस के सामने क्षेत्र में अपनी दहशत कायम करने पर संकट पैदा हो गया है।
ओबामा को संजीवनी
अगर बगदादी के मारे जाने की खबर सही पाई जाती है तो यह ओबामा के लिए हाल में हुए मध्यावधि चुनाव में हार के बाद राहत और बाकी बचे अपने दो साल के कार्यकाल के लिए संजीवनी साबित होगी। ओबामा की पिछले कुछ सालों में कई अभियानों में अमेरिकी सैनिकों को भेजे जाने को लेकर आलोचना भी झेलनी पड़ी थी। वह अपनी जनता को बता सकेंगे कि उनका फैसला सही था।