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इराक बम धमाकों में 60 की मौत

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इराक़ में हुए कई बम धमाकों में 60 से ज़्यादा लोगों की मौत हो गई है जबकि दर्जनों लोग घायल हैं।
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ईद-अल-अजहा मना रहे इराक़ियों पर बग़दाद में हुए हमलों में कम से कम 44 लोग मारे गए।

इससे पहले उत्तरी शहर मूसल के पास शबाक अल्पसंख्यकों वाले मवाफ़ाक़िया गाँव में एक आत्मघाती हमला हुआ जिसमें 15 लोग मारे गए।

अभी तक किसी गुट ने इन हमलों की ज़िम्मेदारी नहीं ली है। इराक़ में ये साल 2008 के बाद से सबसे ज़्यादा हिंसक साल साबित हो रहा है।

वहाँ मौजूद बीबीसी संवाददाताओं का कहना है कि शिया प्रभुत्व वाली सरकार इराक़ के सुन्नी मुसलमानों की शिकायतें दूर करने में नाकाम रही है और उसी की वजह से हमलों में ये तेज़ी हो सकती है।

सुन्नी समुदाय के लोगों की शिकायत रही है कि उन्हें सरकारी नौकरियाँ नहीं दी जाती हैं या वहाँ वरिष्ठ पदों पर नहीं जाने दिया जा रहा है। साथ ही वे सुरक्षा बलों के दुर्व्यवहार की भी शिकायत करते रहे हैं।
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पुलिस का कहना है कि बग़दाद प्रांत में लोग शाम ढले पार्कों और रेस्तराँओं की ओर बढ़ रहे थे जब ये हमले हुए।

अधिकारियों के अनुसार सुन्नी मुसलमानों के प्रभाव वाले शुरता इलाक़े में एक कार बम हमले में तीन लोग और मारे गए।

शबाक समुदाय बना निशाना
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निनेवेह प्रांत के मवाफ़ाक़िया में सबसे बड़ा हमला हुआ, जहाँ 15 लोग मारे गए जबकि 52 लोग घायल हो गए।

सीरियाई सीमा के निकट इस क्षेत्र में सुन्नी मुसलमानों का प्रभाव है। इसके अलावा अल्पसंख्यक शबाक समुदाय भी वहाँ बड़ी संख्या में है तथा उस इलाक़े में अल-क़ायदा काफ़ी सक्रिय रहा है।

इराक़ में संयुक्त राष्ट्र के दूत निकोलाय म्लादेनोव ने शबाक समुदाय को निशाना बनाकर हुए हमलों की निंदा की है। उन्होंने एक बयान में हिंसा तुरंत रोकने की अपील की है।

पिछले ही महीने निनेवेह प्रांत में शबाक समुदाय के एक अंतिम संस्कार के दौरान बम हमला हुआ था जिसमें 20 लोगों की मौत हो गई थी।

इराक़ में हिंसा पर नज़र रखने वाले एक गुट 'इराक़ बॉडी काउंट' के अनुसार इस साल हिंसा में 6,000 लोगों की जान जा चुकी है।

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार सिर्फ़ सितंबर महीने में ही 1000 लोग मारे गए जबकि 2000 लोग घायल हुए। कई वर्षों में एक महीने में इतनी जानें नहीं गईं।
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