जमीन में समाई कॉलोनी की एक अक्टूबर की सैटेलाइट तस्वीरें
इंडोनेशिया का सुलावेसी द्वीप भूकंप और सुनामी से तबाह हो चुका है। राष्ट्रीय आपदा एजेंसी ने मंगलवार को बताया कि मृतकों की संख्या बढ़कर 1234 हो गई है। 84 लापता छात्रों में से 34 के शव एक चर्च में मिले हैं। राहत और बचाव कार्य जारी है। लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया जा रहा है। प्रशासन ने तटीय इलाकों में भूकंप की आशंका को देखते हुए लोगों से घरों में जाने से मना किया है।
भूकंप के तेज कंपन के चलते जमीन के भीतर बन गया कीचड़
इंडोनेशिया के पालू शहर में आया भूकंप इतना शक्तिशाली था कि 1700 से ज्यादा मकानों को जमीन ने निगल लिया है। इन घरों के मलबे के ऊपर साफ मैदान नजर आ रहा है। ग्लोब डिजिटल नाम की कंपनी ने इस तबाही की सैटेलाइट तस्वीरें जारी की हैं।
यूएन के मुताबिक 2 लाख से ज्यादा लोगों को तत्काल मदद की जरूरत है। इंडोनेशिया ने दुनियाभर से मदद की गुहार की है। देश में इस स्थिति से निपटने के लिए 14 दिन के लिए इमरजेंसी लगा दी गई है। इस बीच इंडोनेशिया में अराजकता फैल गई है। पेट्रोल पंप और एटीएम लूटे जा रहे हैं। पुलिस ने 38 लोगों को गिरफ्तार किया है।
1700 से ज्यादा मकान कैसे हो गए दफन
वैज्ञानिकों के मुताबिक जब भूकंप के दौरान बहुत ज्यादा कंपन होते हैं तो गीली मिट्टी में तरलता बढ़ जाती है, जिसे मिट्टी का गलना या पिघलना कहते हैं। यह तब होता है जब भूकंप के कारण गीली मिट्टी पर दबाव बढ़ जाता है और उसके कणों का आपस में संपर्क छूटने लगता है। खासतौर से रेतीली मिट्टी तरल की तरह व्यवहार करने लगती है।
इंडोनेशिया के राष्ट्रीय आपदा एजेंसी के प्रवक्ता सुतोपो पुरवो ने बताया, 'जब भूकंप आया तो धरती के नीचे की सतह कीचड़ में बदल गई और ढीली पड़ गई। इतनी बड़ी मात्रा में कीचड़ ने पोटोबो की कॉलोनी को निगल लिया। हमारा अनुमान है कि वहां 1744 इमारतें थीं।'
भारत ने इंडोनेशिया को भेजी मदद
विशेषज्ञों का कहना है कि मिट्टी का गलना बहुत आम है। जापान में 2011 के भूकंप के दौरान भी यह हुआ था। भारत ने भी इंडोनेशिया की मदद के लिए तीन समुद्री जहाजों को भेजा है। इन जहाजों में 30 हजार लीटर बोतलबंद पानी, 15 हजार लीटर जूस, 500 लीटर दूध, 700 किलो बिस्किट आदि सामग्री हैं।