ब्रिटेन में सिखों पर किए गए 2016 के एक सर्वे में पाया गया कि ब्रिटेन में ज्यादातर सिखों को ‘भारतीय’ या ‘एशियाई’ वर्णित किया जाना अस्वीकार है और वे एक सिख की पहचान के लिए बनाई गई एक अलग जातीय श्रेणी पसंद करेंगे। सिख नेटवर्क द्वारा किए गए वार्षिक सर्वे में ब्रिटेन से 4500 सिखों ने हिस्सा लिया।
सर्वे में यह भी पाया गया कि समुदाय को लगातार भेदभाव और घृणा अपराध का लगातार सामना करना पड़ रहा है। इस रिपोर्ट में नेटवर्क के निष्कर्षों को शामिल किया गया है और ब्रिटिश सिख समुदाय के विकास और मौजूदा प्रवृत्तियों का समझने के लिए सरकारी विभागों, अन्य सार्वजनिक निकायों और राजनीतिक पार्टिंयों की मदद करने का इरादा है।
सर्वे में शामिल 20 सिखों में से 19 ने भारतीय या एशियाई से वर्णित करने को नकार दिया है, जबकि 93.5 फीसदी सिखों ने 2021 जनगणना में सिखों के एक अलग जातीय टिक बॉक्स को शामिल किए जाने का स्वागत किया है।
94 फीसदी से ज्यादा सिखों का कहना है कि सिख पगड़ी और पांच केएस (केश, करा, कंघा, कच्छा और कृपाण) के नित्य प्रयोग के लिए सांविधिक संहिता का स्वागत करेंगे। वहीं रिपोर्ट में कहा गया कि 92 फीसदी सिखों का मानना है कि 1984 में श्री हरमंदिर साहिब पर हमले में ब्रिटिश सरकार से जुड़ी सभी तथ्यों को उजागर करने के लिए एक स्वतंत्र सार्वजनिक जांच होनी चाहिए।
उनका कहना है कि ब्रिटेन में सिखों को कई वर्षों से सार्वजनिक स्थानों पर भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है। पांच में से एक घटनाएं सिखों के साथ भेदभाव और घृणा अपराध को लेकर होती हैं। सनद रहे कि ब्रिटेन में तकरीबन 432,000 सिख रहते हैं, जो कुल आबादी का 0.7 फीसदी हैं।