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लीबिया से रवाना हुईं 58 भारतीय नर्सें

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लीबिया में फंसी भारतीय नर्सों में से 58 नर्सें सीमा पार करके ट्यूनीशिया पहुंच गई हैं। 48 नर्सों का एक दूसरा दल शनिवार को लीबिया की सीमा पार करेगा।
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केरल के मुख्यमंत्री ओमन चांडी ने इन नर्सों को भारत लाने के लिए विशेष विमान का प्रबंध करने की माँग की है। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सैयद अकबरुद्दीन ने ट्वीट करके नर्सों के सुरक्षित ट्यूनीशिया पहुंचने के बारे में जानकारी दी।

सैयद अकबरुद्दीन ने पहले बताया, "58 भारतीय नर्सें रैस जदीर चौकी पर फास्ट ट्रैक से निकाली गईं। उनके पासपोर्टों पर बाहर जाने का परमिट लग गया है। जल्द ही लीबियाई अधिकारी उन्हें आगे बढाएंगे।"
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अगले ट्वीट में प्रवक्ता ने कहा, "लीबिया में राजदूत अजहर खान ने 58 भारतीय नर्सों को लीबिया से बाहर निकलवाया। सीमा के दूसरी ओर ट्यूनीशिया में राजदूत नगमा मलिक उन्हें अपने साथ ले जाएंगी।"

फिर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने उन नर्सों की तस्वीर भी ट्विटर पर ही जारी की। इस बीच केरल के प्रवासियों से जुडे़ मामलों के विभाग ने लीबिया में भारतीय दूतावास को 141 नामों की एक सूची भेजी है।

इस विभाग के मुख्य कार्यकारी पी सुदीप के मुताबिक इनमें से 131 ऐसे भारतीय हैं जो बेनगाजी में फंसे हैं। इनमें नर्सों के अलावा अन्य विभागों में काम कर रहे लोग भी शामिल हैं।
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नर्सों की मुश्किल

इराक में फंसी भारतीय नर्सों को बचाने के लिए सरकार को काफी मशक्कत करनी पडी थी। इससे पहले बेनगाजी के एक अस्पताल जम्हूरिया में काम करने वाली एक भारतीय नर्स ने बीबीसी हिंदी से कहा था, "मेरी आर्थिक स्थिति कमजोर है, इसलिए मैं वापस नहीं लौटना चाहती हूं। लेकिन कई नर्सें अब यहां से जाना चाहती हैं।"

उन्होंने कहा, "एक लीबियाई डॉक्टर ने मुझसे कहा है कि मेरी जिंदगी यहां सुरक्षित नहीं है और किसी भी वक्त कोई रॉकेट मेरे ऊपर गिर सकता है।"

एक अन्य नर्स नीमीया जोस ने कहा था, "हम यहां सुरक्षित नहीं है। हम डरे हुए हैं। किसी भी वक्त कोई घर में घुस सकता है। हम अस्पताल में भी खुद को सुरक्षित नहीं पाते हैं क्योंकि अस्पताल भी चरमपंथियों के कब्जे में हैं। "
असुरक्षा की भावना

एक नर्स लीजी योहानान ने बताया था, "आपसे बात करते हुए इस वक्त भी हमारे चारों तरफ रॉकेट के हमले हो रहे हैं। स्थानीय लोग भी चाहते हैं कि हम यहां से चले जाएं क्योंकि वे सोचते है कि हम असुरक्षित हैं।"

उन्होंने कहा, "हमारे अस्पताल की नर्सों ने स्थिति खराब होने के कारण काम पर आने से हमें मना किया है। जो अस्पताल में हैं उन्हें वहीं रुकने को कहा गया है। " वहीं एक स्कूल में प्रशासनिक पद पर काम कर रहे बेबी जेम्स ने नौकरी छोड दी।

उन्होंने बताया था, "मैंने और मेरी पत्नी ने पैकिंग कर ली है। हमने यहां से जाने का फैसला कर लिया है। मेरी पत्नी नर्स है।"
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