इसके बाद शुक्रवार को दिए अपने निर्णय में रॉयल कोर्ट ऑफ जस्टिस (ब्रिटिश हाईकोर्ट) के जस्टिस लेगेट और जस्टिस डाइंगमेंस ने भारत सरकार की अपील पर निचली अदालत के आदेश को खारिज कर दिया। निर्णय में दोनों जजों ने कहा कि तमाम पहलूओं और अदालत के सामने पेश जानकारियों पर गौर करने के बाद दिख रहा है कि मिस्टर चावला को भारतीय जेल में कोई वास्तविक खतरा (नो रियल रिस्क) नहीं होगा।
दिल्ली निवासी संजीव चावला वर्ष 2000 के उस मैच फिक्सिंग कांड का मुख्य आरोपी है, जिसने भारत और दक्षिण अफ्रीका ही नहीं पूरे विश्व की क्रिकेट को हिला दिया था। उस मामले में दक्षिण अफ्रीका के तत्कालीन कप्तान हैंसी क्रोनिए और तत्कालीन भारतीय कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन समेत निखिल चोपड़ा, अजय जडेजा, अजय शर्मा, नयन मोंगिया और मनोज प्रभाकर जैसे दिग्गजों पर इस फिक्सिंग कांड के छींटे आए थे।
आरोप है कि चावला ने ही इन सभी से मैच फिक्स करने के लिए संपर्क किया था। बाद में क्रोनए की हवाई जहाज दुर्घटना में मौत हो गई थी। चावला 1996 में बिजेनस वीजा पर ब्रिटेन आया था और वर्ष 2000 में अपना भारतीय पासपोर्ट खारिज होने पर वह ब्रिटेन में ही बस गया था। वर्ष 2005 में उसे ब्रिटिश पासपोर्ट मिल जाने से वह वहां का नागरिक बन गया था।
वेस्टमिंस्टर कोर्ट के जिला जज क्रेन ने 16 अक्तूबर, 2017 को चावला के प्रत्यर्पण मामले में दिए फैसले में उसे प्रथम दृष्टया फिक्सिंग का आरोपी स्वीकार किया था। लेकिन कोर्ट ने स्कॉटिश जेल व्यवस्था में मेडिकल अधिकारी रहे डॉ. एलेन मिचेल की तरफ से तिहाड़ जेल में मानवीय हालात नहीं होने की रिपोर्ट देने के आधार पर चावला के प्रत्यर्पण का भारतीय दावा खारिज कर दिया था। माल्या की डिफेंस टीम ने भी उनके प्रत्यर्पण मामले में डॉ. मिचेल को ही पेश किया है।