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भारत से 'चुराई गईं' मूर्तियां ऑस्ट्रेलिया में क्यों हैं?

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भारत ने ऑस्ट्रेलिया से अनुरोध किया है कि वह उसकी 'चुराई गईं' हिंदू देवताओं की दो मूर्तियां लौटा दे। भारत की ये दोनों मूर्तियां ऑस्ट्रेलिया की 'नेशनल गैलरी' संग्रहालय में प्रदर्शित की गई थीं। अब इन दोनों मूर्तियों में से भगवान शिव की मूर्ति वहां से हटा दी गई है।
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हिंदू देवताओं की इन दुर्लभ मूर्तियों को ऑस्ट्रेलिया के संग्रहालय ने साल 2008 में न्यूयॉर्क के एक व्यापारी से 50 लाख डॉलर में खरीदा था। उस व्यापारी पर आरोप है कि वह प्राचीन वस्तुएं चुरा कर उनकी खरीद-फरोख्त करता है।

दूसरी मूर्ति को भी 'न्यू साउथ वेल्स' आर्ट गैलरी से हटा लिया गया है। 'चोरी की गई' इन मूर्तियों को ऑस्ट्रेलिया के संग्रहालय को बेचेने वाले व्यापारी का नाम सुभाष कपूर है, जो कि भारतीय मूल के हैं।
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900 साल पुरानी मूर्ति

सुभाष कपूर पर भारत में बेशकीमती मूर्तियां और दूसरी प्राचीन वस्तुओं की चोरी के आरोप में मुकदमा चल रहा है। वे भारत में होने वाली सुनवाई का इंतजार कर रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया की 'नेशनल गैलरी' ने भी कपूर और उनकी कंपनी पर न्यूयॉर्क में मुकदमा दायर किया है।

गैलरी ने यह कहते हुए मुकदमा किया है कि मूर्तियों से जुड़े दस्तावेज जाली हैं। माना जा रहा है कि यदि जालसाजी से जुड़ा यह आरोप साबित होता है तो व्यापारी को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

एक बयान में कहा गया है कि संग्रहालय ने शिव की मूर्ति खरीदने से पहले एक साल से भी ज्यादा समय तक इसकी जांच-परख की। शिव की कांसे की यह मूर्ति 900 साल पुरानी है।
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ऑस्ट्रेलिया ने चोरी की 22 मूर्तियां खरीदीं थीं

शिव की यह मूर्ति तमिलनाडु के चोल राजाओं के समय में पाई जाने वाली कांस्य की उत्कृष्ट मूर्तियों का एक उदाहरण है। गैलरी की ओर से कपूर और उनकी कंपनी से खरीदी गई 22 मूर्तियों में से यह मूर्ति एक है।

भारत सरकार ने कहा है, "सांस्कृतिक संपदा कानून का उल्लंघन करते हुए इन मूर्तियों का निर्यात किया गया।"

ऑस्ट्रेलिया की मीडिया में आ रही रिपोर्टों के मुताबिक 'नेशनल गैलरी' म्यूजियम इन मूर्तियों को भारत सरकार को वापस करने की तैयारी कर रहा है।
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