तिब्बत में ब्रह्मपुत्र नदी पर तीन बांध बनाने जा रहे चीन पर भारत ने आधिकारिक शिकायत दर्ज की है। भारत ने बीजिंग से अपनी शिकायत में कहा है वो ये सुनिश्चित करे कि बांध के निर्माण से भारत के हितों की हानि न हो।
हाल ही में चीन की कैबिनेट ने ब्रह्मपुत्र नदी पर दागो, चाइशा और शिहू में बांध बनाने के फैसले को स्वीकृति दी है। इस योजना के बारे में भारत को सूचित भी नहीं किया गया।
इसे कदम पर कड़ा ऐतराज जताते हुए भारत ने चीन से कहा है कि वो इसे बात को सुनिश्चित करना होगा कि नदी के ऊपरी भाग में किसी तरह के निर्माण से भारत को किसी तरह का नुकसान न हो।
चीन ने साल 2011-2015 तक ऊर्जा के क्षेत्र में विकास के लिए एक नया ब्लू प्रिंट तैयार किया है जिसमें ये घोषणा की गई है कि ब्रह्मपुत्र नदी पर तीन स्थानों पनबिजली परियोजना लगाएगा।
नाराजगी
इससे पहले जांगमु में एक ऐसी परियोजना का निर्माण हो रहा है। भारत की नाराजगी इस बात को लेकर है इस हफ्ते की शुरुआत में चीन ने जो ऐलान किया इस बारे में न ही उसने भारत से विचार-विमर्श किया और न इस बारे सूचना दी। ये एक तरह से चीन की उस नीति की ओर संकेत देता है कि वो भारत को इस फैसले में शामिल नहीं करना चाहता।
पिछले साल मार्च 2012 में चीनी विदेश मंत्री यांग चाइशी की यात्रा के दौरान भारत ने कहा था कि कई बार दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों और उच्च स्तर पर इस मुद्दे पर बातचीत हुई है। चीन ने कई बार ये कहा भी है कि वो सीमावर्ती नदियों में ऐसा कुछ नहीं करेगा जिससे उन देशों के हितों पर असर पड़े जहां से होकर नदियां बहती हैं।
भारत के लिए सबसे बड़ी दिक्कत केवल यही नहीं है कि चीन नदी पर बांध बना रहा है और वो अपनी दीर्घकालीन योजना के तहत ब्रह्मपुत्र नदी के पानी का मार्ग बदल सकता है बल्कि भारत की परेशानी ये है कि वो इस मामले में किसी अंतरराष्ट्रीय कानून को भी मानने से इनकार करता है।