फ्रांस ने रविवार को 39 साल के इमैनुएल मैक्रों को देश का नया राष्ट्रपति चुन लिया। इमैनुएल मैक्रों की जीत भारत के लिए भी काफी मायने रखती है। बीते साल ही फ्रांस के साथ भारत ने राफेल लड़ाकू विमानों के सौदे को अंतिम रूप दिया था।
मैक्रों का नजरिया भारत के लिए सकारात्मक रहा है। खास बात यह है कि वह भी पीएम मोदी की तरह सबका साथ - सबका विकास की बात कहते हैं। इसीलिए मैक्रों ने चुनाव प्रचार के दौरान यूरोपीयन यूनियन के साथ बने रहने की अपनी नीति भी स्पष्ट कर दी थी। विशेषज्ञ अंदाजा लगा रहे हैं कि यूरोपियन यूनियन को फ्रांस के साथ मिला तो यह भारत के लिए अच्छी बात होगी।
इस बीच पीएम नरेंद्र मोदी ने भी इमैनुएल मैक्रों को जीत के लिए बधाई दी है। मोदी ने कहा कि वह भारत और फ्रांस के रिश्तों को और मजबूत बनाने के लिए मैक्रों से मुलाकात का इंतजार करेंगे। फ्रांस के राष्ट्रपति चुनावों में मैक्रों की जीत से ज्यादातर देशों ने इसलिए खुशी जताई है, क्योंकि उनकी विरोधी दक्षिणपंथी नेता मरीन ली पेन यूरोपियन यूनियन से अलग होने की बात करती रहीं, चुनाव प्रचार के दौरान मरीन ने सिर्फ राष्ट्रवाद की बात की, जबकि मैक्रों ने वैश्वीकरण पर जोर दिया था। दुनिया के ज्यादातर देशों ने मैक्रों की विजय को लोकतंत्र की जीत बताया है।