सेशेल्स के एक द्वीप पर भारतीय नौसेना अड्डा बनाने के समझौते को वहां की संसद मंजूरी नहीं देगी। सेशेल्स विदेश मंत्रालय के एक उच्चाधिकारी ने शुक्रवार को इसकी जानकारी दी। भारत और सेशेल्स ने जनवरी, 2018 में अजम्पसन द्वीप पर सैन्य अड्डा बनाने के समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। हालांकि गुप्त रखे गए समझौते की जानकारी लीक होते ही वहां के प्रमुख विपक्षी नेताओं ने इस परियोजना का विरोध शुरू कर दिया।
सेशेल्स हिंद महासागर में एक छोटा द्वीपसमूह है। परियोजना का विरोध करने वाले विपक्षी सांसदों ने कहा कि एक व्यस्त जलमार्ग के करीब स्थित अजम्पसन द्वीप पर भारत को प्रवेश देने से हम अपने क्षेत्र को किसी और देश को सौंप देंगे। भारत को सुविधा देने से 115 द्वीपों वाले देश की संप्रभुता से समझौता होगा।
विदेश मंत्रालय के सचिव बैरी फॉरे ने कहा कि सरकार समझौते को संसद में पेश नहीं करेगी, क्योंकि विपक्ष ने पहले ही कह दिया है कि वे उसे मंजूरी नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि हालांकि समझौते के बने रहने या रद्द होने को लेकर अभी भी सवाल बना हुआ है। उन्होंने बताया कि भारत समझौते को मंजूरी दे चुका है।
सेशेल्स के राष्ट्रपति डैनी फॉरे रविवार को उत्तराखंड की यात्रा पर भारत आने वाले हैं। इस दौरान वह नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात करेंगे। इससे पहले फॉरे ने स्थानीय मीडिया से कहा था कि अजम्पसन द्वीप पर सैन्य अड्डे के मुद्दे पर मोदी से चर्चा नहीं होगी।