अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) ने रविवार को उन खबरों को खारिज कर दिया जिनमें अटकलें हैं कि वह भारत में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) को सार्वभौमिक मूल आय (यूबीआई) से बदलने के पक्ष में हैं।
पहले आईएमएफ की सालाना वित्तीय निगरानी रिपोर्ट में कहा गया था कि यूबीआई कवरेज, प्रगतिशीलता और उदारता मामले में पीडीएस को छोड़ देगा। आईएमएफ के वित्तीय विभाग के निदेशक विटोर गैस्पर ने कहा कि भारत पर यूबीआई रिपोर्ट केवल ‘केस स्टडी’ है।
यह अध्ययन यह बताने के लिए किया गया है कि कैसे बड़ी और अब कारगर नहीं रहीं योजनाओं को बदला जा सकता है। उन्होंने हम वित्तीय निगरानी को यूबीआई की वकालत के तौर पर नहीं देखते हैं।