पिछले साल पाकिस्तान ने सिल्क रोड के तहत बनने वाली 14 अरब डॉलर की डायमर-भाषा डैम परियोजना पर रोक लगा दी थी। दरअसल चीन पनबिजली परियोजना में चीन हिस्सा चाहता था और पाकिस्तान ने कहा कि यह उसके हितों के खिलाफ है। वहीं पाकिस्तान से हंग्री वाया तंजानिया परियोजना में लागत के विवाद के कारण देरी हो रही है।
कुछ क्षेत्रों में एशिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के वर्चस्व के भय से चीन को राजनीतिक विरोध का सामना करना पड़ रहा है। हांगकांग की एक अनुसंधान कंपनी ‘इकोनॉमिस्ट कॉरपोरेट नेटवर्क’ के रॉबर्ट कोएप ने कहा कि पाकिस्तान उन देशों में से है जो चीन की जेब में है। अब यदि पाकिस्तान आंख दिखाकर कहे, ‘मैं आपके साथ यह करने को तैयार नहीं हूं’ तो इसका मतलब सब कुछ सही नहीं है।
कर्ज तले दबा श्रीलंका
श्रीलंका जैसे देश पहले ही कर्ज में काफी डूब चुके हैं और उनके पास अब कीमती संपत्तियों को बीजिंग को सौंपने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। श्रीलंका के मामले में उसे हंबनटोटा पोर्ट को कर्ज चुकाने के लिए लंबे समय के लिए लीज पर देना पड़ा। लेगार्ड ने ऐसी समस्याओं से बचने के लिए सभी पक्षकारों के साथ पारदर्शिता और सहयोग की बात कही है।