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आईएमएफ प्रमुख की चेतावनी- कर्ज के बहाने एशियाई देशों को दबा रहा चीन

Fri, 13 Apr 2018 08:24 AM IST
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
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अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की प्रमुख क्रिस्टीना लेगार्ड ने चीन के मंच से ही चीन को कड़ी चेतावनी दे डाली। उन्होंने कहा कि अपनी महत्वाकांक्षी वैश्विक व्यापार इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना के माध्यम से चीन दूसरे देशों पर कर्ज का बोझ डाल रहा है। यह उन देशों के लिए मुसीबत पैदा कर देगा।

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लेगार्ड चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की महत्वाकांक्षी ‘बेल्ट एवं रोड पहल’ पर बीजिंग में आयोजित बेल्ट एवं रोड सम्मेलन को संबोधित कर रही थीं। एक खरब डॉलर की इस परियोजना में एशिया से लेकर अफ्रीका और यूरोप तक के कई देशों में रेल और नर्माण परियोजना तैयार की जा रही है। 

इनमें से अनेक परियोजनाएं चीन की सरकारी कंपनियां बना रही हैं और उनके लिए कर्ज भी चीन ही दे रहा है। इसकी वजह से वे देश चीन के अरबों डॉलर के कर्ज में डूबते जा रहे हैं। 
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चीनी और विदेशी अधिकारियों से भरे आयोजन में लेगार्ड ने कहा कि इन योजनाओं से उन पर असामान्य रूप से कर्ज बढ़ जाएगा। इसकी वजह से अन्य मदों पर खर्च करने की उनकी क्षमता सीमित हो जाएगी और भुगतान करने में उन्हें चुनौतियों का सामना करना होगा। उन्होंने कहा कि जिन देशों की आम जनता पहले से ही भारी कर्ज के तले दबी है वहां किसी परियोजना में पैसे लगाने की शर्तों का सावधानीपूर्वक प्रबंधन आवश्यक है।

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पाकिस्तान की कई परियोजनाएं अधर में

- फोटो : ANI
पिछले साल पाकिस्तान ने सिल्क रोड के तहत बनने वाली 14 अरब डॉलर की डायमर-भाषा डैम परियोजना पर रोक लगा दी थी। दरअसल चीन पनबिजली परियोजना में चीन हिस्सा चाहता था और पाकिस्तान ने कहा कि यह उसके हितों के खिलाफ है। वहीं पाकिस्तान से हंग्री वाया तंजानिया परियोजना में लागत के विवाद के कारण देरी हो रही है।

कुछ क्षेत्रों में एशिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के वर्चस्व के भय से चीन को राजनीतिक विरोध का सामना करना पड़ रहा है। हांगकांग की एक अनुसंधान कंपनी ‘इकोनॉमिस्ट कॉरपोरेट नेटवर्क’ के रॉबर्ट कोएप ने कहा कि पाकिस्तान उन देशों में से है जो चीन की जेब में है। अब यदि पाकिस्तान आंख दिखाकर कहे, ‘मैं आपके साथ यह करने को तैयार नहीं हूं’ तो इसका मतलब सब कुछ सही नहीं है।

कर्ज तले दबा श्रीलंका
श्रीलंका जैसे देश पहले ही कर्ज में काफी डूब चुके हैं और उनके पास अब कीमती संपत्तियों को बीजिंग को सौंपने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। श्रीलंका के मामले में उसे हंबनटोटा पोर्ट को कर्ज चुकाने के लिए लंबे समय के लिए लीज पर देना पड़ा। लेगार्ड ने ऐसी समस्याओं से बचने के लिए सभी  पक्षकारों के साथ पारदर्शिता और सहयोग की बात कही है।
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