फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

'औरत का जिस्म होने की वजह से मैं नहीं हूं शर्मिंदा'

Sun, 06 Nov 2016 02:40 PM IST
बीबीसी
विज्ञापन
विज्ञापन
मिस्र की किशोरी गदीर अहमद ने जब बगैर हिजाब के और छोटे कपड़ों में डांस करता हुआ अपना वीडियो अपने ब्वॉय फ्रेंड को भेजा था तो उसने बिल्कुल नहीं सोचा था कि वो उसे ऑनलाइन पोस्ट कर देगा। पर कई सालों के बाद उसने ऐसा कर ही दिया। बाद में गदीर ने खुद ही अपना वीडियो सोशल मीडिया पर रीपोस्ट कर दिया। उन्होंने बीबीसी को बताया, "मैंने ऐसा इसलिए किया क्योंकि इस वीडियो से मेरे शर्मिंदा होने की कोई वजह नहीं थी।"
विज्ञापन


पढ़िए गदीर की कहानी उन्हीं की जुबानी
साल 2009 में मैं 18 साल की थी। मैं और मेरी सहेलियों का ग्रुप अपनी एक दोस्त के घर पर थे। मिस्र में कहीं भी लड़कियों को खुले आम नाचने की इजाजत नहीं है। लिहाजा, हम बंद दरवाजे के पीछे एक साथ नाचती हैं। मैंने अपनी एक सहेली से कहा कि वह मेरे मोबाइल फोन पर नाचते हुए मेरा वीडियो रिकॉर्ड कर दे। उस वीडियो में कुछ भी अश्लील नहीं था। लेकिन मैंने छोटे कपडे़ पहन रखे थे, जिससे मेरा शरीर दिख रहा था। मैंने कुछ दिनों के बाद यह वीडियो अपने ब्वॉय फ्रेंड को भेज दिया।

यूरोप या अमरीका में यह कोई बड़ी बात नहीं होती। पर मैं मिस्त्र के एक साधारण मुस्लिम परिवार से हूं। मिस्र की अधिकतर लड़कियों की तरह मुझे बताया गया था कि पति के सिवा किसी पुरुष को यह हक नहीं कि वह मेरा जिस्म देखे। मैं उन दिनों घर से बाहर निकलने पर मुस्लिम हया की प्रतीक बनी हिजाब पहना करती थी। मैं जानती थी कि इस तरह का वीडियो उस आदमी को भेजना जोखिम भरा था जो मेरा पति या मंगेतर तक नहीं था। खैर, मैंने उसे भेज ही दिया। 
विज्ञापन


बाद में मैंने और जोखिम भरा काम कर दिखाया और उसे कुछ निजी तस्वीरें भी भेज दीं। साल 2012 तक हम अलग हो गए। उसने मुझसे कहा कि यदि मैं फिर उसके वापस नहीं गई तो वह मेरे फोटो और वह वीडियो ऑनलाइन कर देगा। उसे यह पता था कि मैं एक राजनीतिक कार्यकर्ता और महिला अधिकारों की रक्षा के लिए काम करने वाले व्यक्ति के रूप में अपनी सार्वजनिक पहचान बना रही थी। उसने सोचा कि वह इन तस्वीरों का इस्तेमाल कर मेरा करियर और मेरी प्रतिष्ठा को बर्बाद कर सकता था।

मैं वाकई डर गई। मुझे लगा कि मेरा जीवन खतरे में है। हमारे समाज में परिवार की इज्जत बेटियों, बहनों और पत्नियों के क्रिया कलाप पर निर्भर करती है। हमारा जिस्म हमारा अपना नहीं है। वह परिवार के पुरुषों का है और यह वह बर्तन है, जिसमें परिवार की इज्जत रखी जाती है। मैं डर गई कि उस वीडियो से मेरे माता पिता को शर्मिंदगी होगी, मेरे दोस्त और पड़ोसी मेरे पिता की यह कहकर निंदा करेंगे कि वे मेरा लालन पालन एक "अच्छी लड़की" के रूप में नहीं कर पाए। मैंने अपने ब्वॉय फ्रेंड से गुजारिश की कि वह उन तस्वीरों या वीडियो को न प्रकाशित करे।
 
Trending Videos

एक मर्द की बात मैं कभी भूल नहीं सकती

एक साल बाद 2013 में मैं अपनी दोस्तों से बात कर रही थी और कहा कि मुझे नाचना अच्छा लगता है। उस टोली में बैठे एक मर्द की बात मैं कभी भूल नहीं सकती। उसने कहा, "मुझे पता है। मैंने तुम्हें नाचते हुए यूट्यूब पर देखा है।" मेरे पूर्व ब्वॉय फ्रेंड ने न केवल वीडियो को अपलोड कर दिया था, उसने निजी तस्वीरों का इस्तेमाल कर एक वीडियो मोंटाज भी बना दिया और उसे भी अपलोड कर दिया। मैंने तस्वीरों वाला वीडियो तो किसी तरह यूट्यूब से हटवा लिया, पर नाचने वाला वह वीडियो वहीं रहा।

मैंने एक दोस्त और वकीलों की मदद से मानहानि का मुकदमा ठोक दिया। अगले दिन मैंने पुलिस में ब्वॉय फ्रेंड के खिलाफ रिपोर्ट लिखा दी। मेरे परिवार को अब तक इस बारे में कुछ भी पता नहीं था। लेकिन कुछ महीनों बाद मेरी मां ने मुझे फोन किया। मेरे पूर्व ब्वॉयफ्रेंड ने कानून से डर कर मेरे पिता से मुलाकात की और सब कुछ बता दिया। उसने मेरे पिता को मेरी निजी तस्वीरें भी दिखाईं ताकि साबित कर सके कि उसने मेरी देह देख ली है।

उसने मेरे परिवार की इज्जत "फिर से बहाल" करने के लिए मुझसे शादी करने की पेशकश भी की। उसकी शर्त यह थी कि मैं मुकदमा वापस ले लूं। मुझे अब तक शादी के जितने प्रस्ताव मिले, उनमें यह सबसे घटिया था। परिवार की इज्जत महिला की यौन शुचिता से जुड़ी हुई है। यह शुचिता किसी भी तरह टूटी तो उसे शादी करके ही फिर से ठीक किया जा सकता है। अतिरेक के मामलों में उसकी हत्या भी हो सकती थी। कुछ देशों में बलात्कार के मामले में भी यही तर्क लगाया जाता है।

मैं घर लौटी तो मेरी मां बदहवास थीं। उन्होंने कहा, "तुमने हमें शर्मसार कर दिया है।" मैं काहिरा में रहती थी, और तुरंत वहां जाने की बस में बैठ गई। मैं समझ चुकी थी कि मैंने अपना परिवार खो दिया। बस से कुछ किलोमीटर जाने के बाद मैंने यकायक बस ड्राइवर से रुकने को कहा। मैं सीधे अपने घर गई और माता पिता से कहा कि वे सब कुछ ठीक करने में मेरी मदद करें। मैंने कहा, "मैं आपकी मदद के बगैर इसे दुरुस्त नहीं कर सकती।"

मेरे पिता गुस्से से भरे हुए थे। मैंने समझाने की कोशिश की कि गलती मेरी नही, बल्कि उस शख्स की थी जिसने मेरी निजता का उल्लंघन किया। वे इससे कतई सहमत नहीं थे। लेकिन जबरदस्त सामाजिक दवाब के बीच भी मेरे माता पिता ने निजता के हक के मामले में मेरा साथ दिया। मानहानि के मामले में मेरा पूर्व ब्वॉय फ्रेंड दोषी पाया गया और उसे गैर हाजिर रहने की सूरत में ही एक साल जेल की सजा सुनाई गई।

मामले को पटरी से उतारने के लिए उसने पैसे के लेन देन पर एक अलग मामला मुझ पर ठोक दिया। पूरी प्रक्रिया से उकता कर मैंने शिकायत वापस लेने का फैसला कर लिया। उसकी सजा वापस हो गई, उसे गिरफ्तार नहीं किया गया न ही उसे जेल जाना पड़ा। साल 2012 में मिस्र के विद्रोह और तहरीर चौक पर हुए प्रदर्शनों के एक साल बाद मैंने 'गर्ल्स रिवोल्यूशन"नाम से एक ग्रुप बनाया था। यह ट्विटर पर एक हैशटैग से शुरू हुआ और जल्द ही बदलाव की मांगकर रही युवतियों का बड़ा आंदोलन बन गया।

लगभग इसी समय मैंने हिजाब निकाल फेंकने का फैसला कर लिया और फेसबुक, टीवी बहस और दूसरी जगहों पर अधिक मुखर हो गई। इससे खफा कुछ मर्दों ने सोशल मीडिया पर मुझे अपमानित करना शुरू कर दिया। अक्टूबर 2014 में उन्होंने कुछ ट्रॉल पोस्ट किए और उसके साथ नाचने वाले वीडियो का लिंक भी लगा दिया। उन्होंने इसके साथ टिप्पणी की, "यह है गदीर अहमद, जो मिस्र की लड़कियों को भ्रष्ट करना चाहती है, और ये है वीडियो जिससे पता चलता है कि वह खुद बेशर्म है।"
विज्ञापन

मैने शरीर दिखाने वाले और छोटे कपड़े पहन रखे थे

मेरे लिए यह टूट जाने का वक्त था। मैं गुस्से से फट पड़ी। मैंने सोचा, "नहीं। कोई मेरा ब्लैकमेल करे, मैं यह नहीं होने दूंगी। मैं डरूंगी नहीं। महिला की देह होने की वजह से शर्मसार होने से मैं इनकार करती हूं। मैं अपने शरीर की वजह से कभी भी अपराध बोध का अनुभव नहीं करूंगी न ही डरूंगी।" मैं अपनी कहानी साझा कर रही हूं ताकि पूरी दुनिया में डिजिटल तस्वीरों की वजह से धमकाई जाने वाली लड़कियों को हौसला मिले।

इसलिए, मैंने वह नाचने वाला वीडियो अपने ही फेसबुक पेज पर पोस्ट कर दिया ताकि पूरी दुनिया इसे देख सके। इसके साथ मैंने पोस्ट लिखा, "कल मर्दों के एक समूह ने सहेलियों के साथ नाच करते मेरे निजी वीडियो को साझा कर मुझे शर्मसार करने की कोशिश की। मैं यह लिख रही हूं यह एलान करने के लिए कि हां उस वीडियो में मैं ही थी और नहीं, मैं अपनी देह को लेकर शर्मिंदा नहीं हूं।"

मैंने आगे लिखा, "जो लोग मुझ पर दाग लगाना चाहते हैं उनको मैं बताना चाहती हूं कि औरतों के शरीर को लेकर पूरे पूरब के समाज में गलतफहमियां हैं, नारीवादी होने की वजह से मैं उससे ऊपर उठ चुकी हूं। खुश हो कर नाचने की वजह से मैं बिल्कुल शर्मिंदा नहीं हूं, मैं अपनी बहन की शादी पर भी नाची थी, जहां मैने शरीर दिखाने वाले और छोटे कपड़े पहन रखे थे। अब मैं आप लोगों से पूछना चाहती हूं कि आपको दरअसल क्या चाहिए? मैं बेशर्म रहूं या आपके साथ सोए बगैर बेशर्म रहूं? मेरा शरीर शर्म की वजह नहीं है। उस वीडियो पर मुझे कोई पछतावा नहीं है।"

यह पोस्ट तुरंत पूरे मिस्र में वायरल हो गया। बहुत सारे लोगों ने देखा कि मैं कितनी बहादुर हूं और मेरे तर्क को मान लिया। मेरे नजदीकी दोस्तों ने मुझे फोन कर मेरा समर्थन किया। अंत में पांच साल बाद मुझे लगा कि सब कुछ खत्म हो गया। मैंने मानो दरवाजा बंद कर दिया। दो साल बीत जाने के बाद आज मुझे वीडियो पोस्ट करने पर कोई अफसोस नहीं है। लड़कियों को जिस सांचे में ढाल दिया जाता है, उससे बाहर निकलने में उन्हें बार बार सांचा तोड़ना पडता है।

लड़की को तन कर कहना पड़ेगा, "हां। निजी तस्वीरों को लेकर मेरा ब्लैकमेल किया गया। हां, मैने उन्हें अपनी मर्जी से ही भेजे थे। इसके बावजूद किसी को यह हक नहीं कि वह मुझे अपमानित या बेइज्जत करने के लिए उनका इस्तेमाल करे।" मैं अपनी कहानी साझा कर रही हूं ताकि पूरी दुनिया में डिजिटल तस्वीरों की वजह से धमकाई जाने वाली लड़कियों को हौसला मिले। मैं कहना चाहती हूं: आप अकेली नहीं हैं। आप जिस संघर्ष से गुजर रही हैं, मैं उससे गुजर चुकी हूं। मैंने अकेलापन, असहाय, कमजोरी और शर्म को महसूस किया था। 

ऐसे समय भी आए जब मैं पूरी तरह निढाल हो गई। मुझे यह हक नहीं कि आपसे कह सकूं कि आप भी मेरी तरह ही संघर्ष करें। लेकिन मैं अपील करती हूं कि जिस पर आपको भरोसा हो, उससे मदद मांगे। एक बार मदद मांगने से आप कम अकेली, कम खतरे में खुद को पाएंगी। हम साथ मिल कर उस संस्कृति को बदल सकते हैं जो हमे डराती है और शर्मिंदा करती है। हम एक साथ जी सकती हैं, बहनों के रूप में हम इस दुनिया को औरतों के लिए बेहतर बना सकती हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें