ऑनलाइन पॉर्नोग्राफी से किशोरों के मन में सेक्स के प्रति ग़लत नज़रिया विकसित होता है। एक युवती ने अपने अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि उन्हें यह लगने लगा था कि बलात्कार सामान्य बात है।
एक रिपोर्ट कहती है कि अगर बच्चों को कच्ची उम्र में ही इंटरनेट पर हिंसक पॉर्नोग्राफी देखने को मिले तो इससे सेक्स को लेकर उनके मन में एक विकृत नजरिया उभरने लगता है।
कारेन (बदला हुआ नाम) का अनुभव भी कुछ ऐसा ही रहा है जिसके चलते वो बलात्कार को सामान्य बात समझने लगीं।
कारेन उस वक्त महज 16 साल की थीं जब पहली बार किसी लड़के के साथ उन्होंने शारीरिक संबंध बनाया था। उस लड़के को ऑनलाइन पॉर्न तस्वीरें या फ़िल्में देखने में काफी दिलचस्पी थी।
उस लड़के के पास एक स्मार्टफोन था जिसका इस्तेमाल वह अश्लील तस्वीरें और फिल्म देखने में करता था। स्मार्टफोन को वह अपने माता-पिता से छुपा कर रखता था।
वह कहती हैं, “मैं उन लड़कों के साथ बड़ी हुई थी जो पॉर्न फ़िल्में देखते थे, कई दफा वे अपनी गर्लफ़्रेंड के साथ भी ये सब देखते थे। मैंने सोचा कि यह सब सामान्य है क्योंकि सभी लोग ऐसा करते हैं।”
उन्होंने अपनी दोस्त के बड़े भाई के बेडरुम में पहली बार जब पॉर्न फ़िल्म देखी थी, उस वक्त कारेन 11 साल की थीं। उसके बाद पोर्नोग्राफी उनके जीवन का हिस्सा बन गया। पॉर्न वेबसाइटों और फिल्मों को किसी म्यूज़िक वीडियो की तरह दोस्तों के साथ साझा करना बेहद आम बात हो गई।
'स्याह पहलू'
वह कहती हैं, “उस वक्त कुछ बुरा नहीं लगता था और न ही इससे सावधान रहने की ज़रुरत महसूस होती थी।” लेकिन उसके बाद इसका स्याह पहलू नज़र आया।
“जब उस लड़के के साथ मेरे बेहद करीबी संबंध बने, तब मैंने महसूस किया कि वह कैसी और किस हद तक पॉर्न वीडियो देखता था। सब लोग जो अश्लील फ़िल्में देखते थे, यह उससे काफ़ी अलग था।”
वह कहती हैं, “जब हम शारीरिक संबंध बनाते थे, उस वक्त भी वह पॉर्न फ़िल्में दिखाता था। उस दौरान मैंने महसूस किया कि वह जो पॉर्न वीडियो देखता था, वह बेहद कामुक और ग्राफिकल होती थी।”
जैसे-जैसे वे दोनों और क़रीब आते गए उन्होंने स्मार्टफोन पर “रेप पॉर्न” देखना शुरू कर दिया।
वह कहती हैं, “वह स्क्रीन पर जो कुछ अश्लील हरकतें देखता था, ठीक वैसा ही वह मेरे साथ करने की कोशिश करता था।”
उन्हें ऐसा लगने लगा कि मानों उनसे यह उम्मीद की जा रही हो कि जिस लड़की का बलात्कार किया जा रहा है, वह बिल्कुल उसी भूमिका को निभाए।
वह कहती हैं, “वह मेरा पहला ब्वॉयफ़्रेंड था और मैंने समझा कि यही सेक्स लाइफ है और मुझे यही सब कुछ करना है।”
हालांकि वह अपने ब्वॉयफ़्रेंड के कहने पर जो कर रही थीं, उसमें उन्हें बिल्कुल मज़ा नहीं आ रहा था। लेकिन उन्हें ऐसा भी महसूस नहीं हुआ कि उन्हें इसके लिए ना कहने का अधिकार है।
उन्होंने सोचा कि वीडियो में जो कुछ दिख रहा था वह सामान्य था क्योंकि उनके ब्वॉयफ़्रेंड ने उन्हें ऐसे कई वीडियो दिखाए थे।
वह कहती हैं, “मैंने सोचा कि शायद मैं सही तरीके से वह सब कुछ नहीं कर पा रही हूं इसलिए मुझे मज़ा नहीं आ रहा है। मुझे नहीं लगा कि मैं कभी इसके लिए ना बोल पाऊंगी।”
डरावना सच
उन्हें इस बात का अंदाज़ा हो गया था कि वह जो वीडियो देखती हैं उनमें से कई बिल्कुल बलात्कार के वीडियो थे। उसमें महिलाएं बेहद परेशान, चीखती-चिल्लाती हुई दिख रही थीं।
“कभी-कभी मैं सोचती थी कि मैं भी उसी हालत में हूं। मैं नहीं जानती कि उसे यह महसूस भी हुआ कि नहीं कि न तो वे महिलाएं अभिनय कर रही थीं और न ही मैं।”
कारेन कहती हैं कि उन्हें अक्सर यह सब कुछ एक डरावने सच की तरह लगा। वह चाहती थी कि यह सबकुछ जल्द ख़त्म हो जाए और उनका ब्वॉयफ्रेंड उन्हें छोड़ दे।
उनके मन में सेक्स और काम-वासना से जुड़े विचार उन पॉर्नोग्राफी से ही बने थे, जिन्हें वह देखती थीं।
उन्होंने यह महसूस किया कि उनकी ज़रुरतें और इच्छाएं अहम नहीं थीं और उनकी भूमिका बस अपने ब्वॉयफ़्रेंड को संतुष्ट करने तक सीमित हो गईं।
वह कहती हैं कि कोई भी महिलाओं की सेक्सुअलिटी के बारे में बात नहीं करता है। सेक्स से जुड़ी सभी बातों में पुरुष की इच्छाओं और उनकी काम प्रवृति ही अहम होती है और एक महिला को वही सब कुछ करना पड़ता है जो उनका पुरुष कहता है।
वह कहती हैं, “महिलाओं के लिए इतनी गुंजाइश नहीं होती है कि वह यह महसूस कर पाए कि वे जिस तरह का यौन संबंध बना रही हैं वह ऐसा नहीं होता या उन्हें यह पसंद नहीं है।”
सलाह की ज़रुरत
बेडरूम के बाहर जो दिक़्कतें हुईं उनकी वजह से उनका संबंध टूट गया, कारेन क़रीब चार साल के बाद अपने अनुभवों के बारे में बात करने के लिए ख़ुद को तैयार कर पाई।
अब वह 20 साल की हो चुकी हैं। करीब आठ महीने की काउंसलिंग के बाद उनमें आत्मविश्वास आया और वह रिश्तों के बारे में सकारात्मक तरीके से सोच पा रही हैं।
वह अपने पहले ब्वॉयफ़्रेंड को दोष नहीं देना चाहती और न ही वह उन्हें एक बलात्कारी समझती हैं।
वह कहती हैं, “मुझे लगता है कि वह काफ़ी भ्रमित थे और उन्होंने ऑनलाइन वैसी कई चीज़ें देख लीं जिनकी उन्हें उम्मीद तक नहीं थी। उन्हें लगा कि यह सब कुछ सामान्य है और उन्होंने पॉर्न वीडियो वाली चीज़ों की नकल इसलिए कि क्योंकि उन्हें भी यही लगा कि इसी तरह की क्रिया को सेक्स कहते हैं।”
(यह रिपोर्ट बीबीसी के सामाजिक मामलों के संवाददाता माइकल बुकानन द्वारा लिए एक साक्षात्कार पर आधारित है।)