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'उसने मुझे छुआ और सेक्स का प्रस्ताव रख दिया'

Wed, 10 Aug 2016 04:13 PM IST
नोमिया कोलोना/ बीबीसी, ब्राज़ील
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- फोटो : बीबीसी
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47 साल की मोनिका वैलेरिया गॉनकेल्वस के पास यूनिवर्सिटी की दो-दो डिग्रियां हैं। वो ब्राजील की राजधानी ब्रासिलिया में कानूनी सलाहकार के तौर पर काम करती हैं। उनकी शादी एक जज से हुई हैं। वो अक्सर ही महंगे रेस्त्रां और सामाजिक समारोहों में जाया करती हैं। कहने का मतलब यह है कि वो ब्राजील की एक फीसदी बेहद अमीर जमात का हिस्सा हैं। सिर्फ एक फर्क है जो उन्हें इस एक फीसदी वाले वर्ग से अलग करता है। वो यह है कि वे एक काली महिला हैं।
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पिछली जनगणना के मुताबिक ब्राजील की 53 फीसदी आबादी काली और मिश्रित नस्ल की है। ब्राजील के उच्च वर्ग में इनकी हिस्सेदारी बहुत कम है। पार्टियों, रेस्त्रां, सामाजिक और पेशेवर आयोजनों में अक्सर वो अकेली काली महिला होती हैं। जब वो कांफ्रेंस में अपने पति के साथ होती हैं तो लोग सोचते हैं कि वो उनकी सेक्रेट्री हैं। वो कहती हैं, "लोग उन्हें लेकर गलत अंदाजा लगाते हैं।"

लेकिन 22 साल पहले जब वो एक बीच के किनारे एक रिसॉर्ट में हनीमून मनाने के लिए ठहरे थे तो एक ऐसा वाकया हुआ जिसने उन्हें सबसे ज्यादा ठेस पहुंचाई। वो उसके बारे में बताती हैं, "एक आदमी ने मुझे छुआ और खुलेआम सेक्स का प्रस्ताव रख दिया। मैं डर गई और उस पर चिल्लाने लगी। उसने मुझसे माफी मांगी और कहा कि उसने सोचा कि मैं एक गोरे आदमी के साथ एक वेश्या के तौर पर आई हूं।"
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मैंने जब कहा कि यह गलत है तो उन्होंने माफी मांगी

- फोटो : बीबीसी
वो आगे कहती हैं, "उसे बिल्कुल नहीं लगा कि वो गोरा आदमी मेरे पति हैं। उसके लिए यह सोचना भी संभव नहीं था।" ब्रासिलिया यूनिवर्सिटी के समाजशास्त्री इमर्सन रोचा का कहना है कि ब्राजील में आपके अमीर होने के साथ ही नस्लवाद खत्म नहीं हो जाता है। वास्तविकता ठीक इससे उलट है। एक बार काले लोग अपने 'स्वभाविक इलाके' को छोड देते हैं तो उन पर नस्लीय हमले होने की गुंजाइश बढ़ जाती है। वो गोरों के दबदबे वाले इलाकों में किसी बाहरी तत्व की तरह होते हैं।

मोनिका बताती हैं, "मुझे पूरी जिंदगी दिखाना पड़ा कि मैं जो करती हूं उसमें बहुत अच्छी थी। अगर मैं ऐसा नहीं करती थी तो मुझे मेरे काम और मेरे रंग दोनों के हिसाब से परखा जाता था।" लेकिन फिल्मकार सबरीना फिडाल्गो का ऐसा मानना नहीं है। वो जन्म से ही अमीर थीं। 

वो कहती हैं, "मेरे मां-बाप ने मुझे इस लड़ाई के लिए तैयार कर रखा था। जब मैंने स्कूल जाने की शुरुआत की तब ही उन्होंने नन को चेतावनी दे दी थी कि अगर मैं नस्लवाद का शिकार हुई तो वे चीख-चीखकर इसका विरोध करेंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि नस्लवाद के बारे में सभी को पता चलने के लिए स्कूल ही जिम्मेदार है। वे प्रतिक्रियावादी नहीं बल्कि शुरू से सजग थे।"

लेकिन सेकेंडरी स्कूल में चीजें बदल गई थीं। वो अपने एक टीचर के बारे में बताती हैं जो अपने नस्लवादी दादी के बारे में बेहिचक होकर चुटकुले सुनाया करते थे। वो बताती हैं, "मैंने उनसे जब कहा कि यह गलत है तो उन्होंने माफी मांगी और चुटकुले कहना बंद कर दिया।" सबरीना इसके लिए अपने मां-बाप की सीख को श्रेय देती हैं जिन्होंने विरोध करना सिखाया।
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चीजें धीरे-धीरे बदल रही हैं

- फोटो : बीबीसी
सबरीना मानती हैं कि लोगों को नस्लवाद के बारे में बात करनी चाहिए लेकिन चेतावनी भी देती हैं कि काले लोगों को सिर्फ इसी नजरिए से नहीं देखना चाहिए। नइमर्सन रोचा इस बात से सहमत हैं कि नस्लवाद की निंदा करना बहुत जरूरी है लेकिन सकारात्मक अनुभवों की भी इसमें बड़ी भूमिका है। वो जुलियो सैंटोस की कहानी का उदाहण देते हैं।

पचास साल के जुलियो सैंटोस एक नौकरानी के बेटे हैं। वो 13 साल की उम्र से कार साफ करने का काम करते थे। आज वो एक इंजीनियर हैं और सफलतापूर्वक एक रिसाइकलिंग कंपनी के मालिक हैं। वो कहते हैं, "न्यूयॉर्क में मेरा अपना बिजनेस है। लेकिन ब्राजील की बात अलग है।"

मोनिका का मानना है कि चीजें धीरे-धीरे बदल रही हैं। उनकी आठ साल की एक बेटी है। वो समतामूलक समाज के लिए तेजी से बदलाव होते हुए देखना चाहती हैं। उनकी बेटी लेटिसिया एक निजी स्कूल में पढ़ती है जहां कालों के सिर्फ दो बच्चे पढ़ते हैं। वो बताती हैं, "स्कूल में दो सौ से ज्यादा बच्चे पढ़ते हैं लेकिन उनमें सिर्फ दो बच्चे ही काले हैं एक मेरी बेटी और एक दूसरी लड़की जो एक नौकरानी की बेटी है।"
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