फलस्तीनी संगठन हमास के नेता खालिद मशाल ने कहा है कि इसराइल की ओर से गजा की आर्थिक नाकेबंदी खत्म होने तक संघर्ष विराम नहीं हो सकता।
कतर में उन्होंने पत्रकारों से कहा,''हर कोई हमसे चाहता है कि हम संघर्ष विराम को स्वीकार करें और फिर अपने अधिकार के लिए बातचीत करें। हमने पहले भी उसे खारिज किया था और आज भी खारिज करते हैं।''
2006 से जारी नाकेबंदी को खत्म करने के अलावा मशाल ने मिस्र के साथ लगने वाले रफाह सीमा को खोलने और फलस्तीनी कैदियों को छोड़ने की भी शर्त रखी है।
मशाल ने कहा, ''हम ऐसे किसी कदम को स्वीकार नहीं करेंगे जो हमारे लोगों पर जारी नाकेबंदी को खत्म नहीं करता और हमारे लोगों के बलिदान की कद्र नहीं करता।''
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से गजा में दवाएं, तेल और अन्य सामानों की आपूर्ति करने की अपील की है।
संघर्ष विराम के लिए शर्त नहीं
उधर, मिस्र के राष्ट्रपति अल सीसी ने कहा है कि संघर्ष विराम के लिए शर्तें नहीं होनी चाहिए।
वहीं संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद् एक आपात बैठक में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयुक्त नवी पिल्लै ने कहा, "इस बात की संभावना अधिक है कि इसराइल ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों की अनदेखी करते हुए नियमों का उल्लंघन किया हो, जो युद्ध अपराध के समान हैं।"
इसराइल की राजधानी तेल अवीव के पास स्थित हवाईअड्डे पर हमास की ओर से दागा गया एक रॉकेट गिरने के बाद वहां यूरोप और अमरीका की कई एयरलाइंस ने उडान भरने से इंकार कर दिया है।
अब तक गई सैकडों लोगों की जान
अधिकारियों के अनुसार पिछले 15 दिन से जारी संघर्ष में अब तक 649 फलस्तीनी और 32 इसराइली मारे गए हैं। इसराइल ने आठ जुलाई को गजा से रॉकेट हमलों को खत्म करने के लिए गजा में सैन्य अभियान शुरू किया था।
गजा के पीडितों का कहना है, ''अरब देशों को अन्याय देखना चाहिए। उन्होंने उस समय हमारे घरों पर हमले किए जब हम घर पर ही थे। उन्होंने कोई चेतावनी नहीं दी।''
बुधवार को संयुक्त राष्ट्र परिषद में गजा में युद्ध अपराधों की जांच के समर्थन में एक प्रस्ताव पारित हो गया।